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उत्तराखंड : तीरथ सिंह रावत को हटाकर अब नए निजाम के हाथों में कमान, चुनौतियां तमाम

Sun, 04 Jul 2021 01:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 04 Jul 2021 01:00 AM IST
सार

सियासी जानकारों का मानना है कि आठ महीने के छोटे से कालखंड में यदि नया निजाम इन चुनौतियों से पार पा लेता है तो यह किसी करिश्मे से कम नहीं होगा।

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Pushkar Singh Dhami Elected New CM of Uttarakhand Today : economical problem
pushkar singh dhami - फोटो : PTI

विस्तार

प्रचंड बहुमत से सत्ता पर काबिज भाजपा ने तीरथ सिंह रावत को हटाकर कमान अब नए निजाम के हाथों में सौंपी है। उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। विधानसभा चुनाव की महाचुनौती लांघने से पहले नए निजाम को दूसरी कई चुनौतियों से पार पाना होगा।

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सियासी जानकारों का मानना है कि आठ महीने के छोटे से कालखंड में यदि नया निजाम इन चुनौतियों से पार पा लेता है तो यह किसी करिश्मे से कम नहीं होगा। लेकिन क्या यह इतना आसान है?  यह प्रश्न इसलिए कि पिछले चार साल के शासन में भी चुनौतियों के पहाड़ अब भी जहां के तहां खड़े हैं? अमर उजाला ने इन चुनौतियों की सिलसिलेवार पड़ताल की। 
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कर्ज के दलदल में फंसी सरकार की आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया
नए मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक प्रबंधन की है। आय के सीमित संसाधनों की वजह से राज्य की अर्थव्यवस्था की सांसें केंद्रीय इमदाद से चल रही हैं। केंद्र पोषित योजनाओं व अवस्थापना कार्यों की बड़ी योजनाओं की वजह से उत्तराखंड में विकास का पहियां कुछ चलता दिखाई दे रहा है। लेकिन आय के मामले में राज्य सरकार के हालात बहुत अच्छे नहीं हैं।

सरकार पर 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। उसकी आमदनी का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों व पेंशनरों के वेतन और पेंशन पर खर्च हो जाता है। देश में जीएसटी लागू होने के बाद करों से होने वाली आमदनी में कमी आई है। हालांकि केंद्र इसकी भरपाई कर रहा है। लेकिन 2022 के बाद केंद्र भरपाई नहीं करेगा, जिससे राज्य के राजस्व में कमी आने के आसार हैं।

43 फीसदी खर्च वेतन व पेंशन पर

उत्तराखंड सरकार में बजट का 43 फीसदी वेतन, भत्तों व पेंशन पर खर्च हो जाता है। इस साल सरकार ने 57400.32 करोड़ का बजट पास किया है। इसका 29.58 प्रतिशत कर्मचारियों के वेतन और 13.03 प्रतिशत पेंशन व अन्य पर खर्च का अनुमान है। ऐसे हालात में विकास एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए सरकार पूरी तरह से केंद्र पोषित योजनाओं पर ही निर्भर होती है। बजट में ही सरकार ने 35.83 प्रतिशत आय का अनुमान केंद्रीय सहायता के रूप में दिखाई है।

कोविड से चौपट आर्थिकी को पटरी लाने की चुनौती
कोरोना की दूसरी लहर में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ चारधाम यात्रा अब तक शुरू नहीं हो पाई है। पर्यटन कारोबार पिछले दो महीने से ठप रहा। तीर्थांटन व पर्यटन कारोबार से जुड़े छोटे से लेकर बड़े कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार के सामने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ नुकसान उठाने वाले लोगों के जख्मों पर राहत पैकेज का मरहम भी लगाना होगा। लेकिन कोविडकाल में सरकार की आमदनी पर गहरी चोट लगी है। ऐसे हालात में सरकार राहत पैकेज के लिए धन कहां से जुटाएगी, यह बड़ा सवाल है।

कितना उठा पाएंगे डबल इंजन का फायदा
चुनावी साल में विकास की रफ्तार को तेज करना भाजपा सरकार की राजनीतिक मजबूरी भी है। चुनाव में विपक्षी दल उससे डबल इंजन से मिले लाभ का हिसाब-किताब भी पूछेंगे। नए मुखिया के सामने अब यह चुनौती होगी कि वह केंद्र सरकार से राज्य के विकास के लिए कितनी इमदाद और सहायता हासिल कर पाते हैं। त्रिवेंद्र और तीरथ भी केंद्रीय नेताओं के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक राज्य की झोली में केंद्र की नेमत नहीं बरसी है।

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