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उत्तराखंड: नये सीएम के सामने तीर्थ पुरोहितों को साधने और कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की चुनौती

Sat, 03 Jul 2021 11:40 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 03 Jul 2021 11:40 PM IST
सार

त्रिवेंद्र सरकार के समय पहली बार चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया गया। उस समय भी चारधामों के तीर्थ पुरोहितों, हक हकूकधारियों, पंडा समाज ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। लेकिन त्रिवेंद्र अपने फैसले पर अडिग रहे।

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Pushkar Singh Dhami Elected New CM of Uttarakhand Today : chardham tirtha purohit and corona third wave challenge
पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नये मुख्यमंत्री के सामने कई चुनौतियां है। कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव भले ही कम हुआ है। लेकिन संभावित तीसरी लहर को रोकने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजाम करने और देवस्थानम बोर्ड को लेकर असंतुष्ट तीर्थ पुरोहितों व हक हकूकधारियों को साधने की चुनौती रहेगी। 

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त्रिवेंद्र सरकार के समय पहली बार चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया गया। उस समय भी चारधामों के तीर्थ पुरोहितों, हक हकूकधारियों, पंडा समाज ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। लेकिन त्रिवेंद्र अपने फैसले पर अडिग रहे। तीरथ सिंह रावत ने सत्ता संभालते ही देवस्थानम बोर्ड पर जनभावनाओं के अनुरूप फैसला लेने का एलान किया था। लेकिन 115 दिन के कार्यकाल में देवस्थानम बोर्ड को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाए। जिससे तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारी आंदोलन कर रहे हैं। 
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प्रदेश में कोरोना संक्रमण का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। दूसरी लहर की रफ्तार कम हो गई है। लेकिन कोरोना की संभावित तीसरी लहर को रोकना की चुनौती सरकार के सामने है। तीसरी लहर में संक्रमण का ज्यादा प्रभाव बच्चों पर पड़ने की संभावना है। इसके लिए प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ बच्चों के लिए आइसोलेशन, आईसीयू, वेंटिलेटर की इंतजाम करना होगा। विधानसभा चुनाव से पहले नए मुख्यमंत्री के सामने कोरोना की तीसरी लहर की रोकथाम, देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों को साधने की चुनौती होगी।
 

पहाड़ जैसी समस्याएं दूर करना नए सीएम के लिए चुनौती 

पहाड़ी राज्य के कर्मचारियों की समस्याएं भी पहाड़ जैसी हैं। मात्र सात महीने के इतने कम कार्यकाल में इन समस्याओं को दूर करना प्रदेश के 11वें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए चुनौती होगी। पांच महीने बाद राज्य में चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। कोविड की वजह से वैसे ही शासन में काम की रफ्तार पहले ही धीमी है। ऐसे में कर्मचारियों की समस्याओं से पार पाना कम आसान नहीं होगा।

प्रदेश में तमाम विभागों में अधिकारियों, कर्मचारियों के प्रमोशन रुके हुए हैं। माध्यमिक शिक्षा में सहायक अध्यापक एलटी से लेक्चरर के पद पर लगभग 1800, प्रधानाध्यापक के पद पर 450 और प्रिंसिपल के पद पर 900 प्रमोशन रुके हैं। कुछ यही हाल बेसिक और जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों का है। इसके अलावा अन्य विभागों की भी यही स्थिति है।

शिक्षकों का चयन और वेतनमान का मामला भी लंबित है। शिक्षकों को स्वत: सत्रांत लाभ, बेसिक से माध्यमिक में समायोजित शिक्षकों को पूर्व में की गई सेवा का लाभ, तबादला एक्ट को पूरी तरह से लागू कराना सहित कई मामले किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। 

राजस्व विभाग सहित विभिन्न विभागों में मृतक आश्रितों को दस महीने बाद भी नौकरी नहीं मिल पायी है। वहीं प्रदेश में 1500 जूनियर हाईस्कूलों को अपग्रेड किया जा चुका है। जिन्हें अपग्रेड किए जाने से जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों के प्रमोशन के पद समाप्त हो रहे हैं। संगठन की ओर से लगातार यह मांग की जा रही है कि जूनियर हाईस्कूलों का या तो अलग से संचालन किया जाए या फिर विभाग में त्रिस्तरीय व्यवस्था को लागू किया जाए। शिक्षकों का वेतन विसंगति को दूर किए जाने का मामला भी वर्षों से लंबित हैं।

संगठन का कहना है कि समस्या को दूर करने के लिए शासन के साथ कई बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद भी समस्या जस की तस है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षक संस्थान कर्मचारियों की अनुदेशक, कार्यदेशक व भंडारी संवर्ग में प्रमोशन, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन सहित कई मांगें लंबित हैं। प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों का संबद्धता, वेतन और प्रमोशन का मामला भी लटका है। 

सात महीने में 20 हजार से अधिक पदों पर भर्ती भी चुनौती 

प्रदेश के 10 वें मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जाते-जाते विभिन्न विभागों में 20 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की घोषणा कर गए हैं, लेकिन सात महीने के भीतर भर्ती करा पाना नए मुख्यमंत्री के लिए कम आसान नहीं होगा। वह भी तब जबकि कई विभागों में भर्तियां सेवा नियमावली को लेकर कानूनी दांव पेंच में उलझी हुई हैं। 

पुरानी योजनाओं को पटरी पर लाना भी होगी चुनौती 
प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें और ड्रेस समय से दी जानी हो या फिर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती, वात्सल्य योजना का सफल संचालन, कोविड मृतक आश्रितों को राहत राशि आदि कई योजनाएं हैं। जिन्हें पटरी पर लाना चुनौती होगी। 

राजस्व विभाग में कई मृतक आश्रितों को दस महीने बाद भी नौकरी नहीं मिल पायी है, यही हाल कुछ अन्य विभागों का है। देखना यह है कि नए सीएम के बनने से व्यवस्था पटरी पर आ पाती है या नहीं।
-गोविंद सिंह नेगी, अध्यक्ष राजस्व कर्मचारी महासंघ

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