यहां अब भगवान ने भी 'महंगे' किए आशीर्वाद
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जहां एक तरफ सब्जी से लेकर हर चीज में महंगाई ने कब्जा किया हुआ है। वहीं अब भगवान ने अपना आशीर्वाद भी महंगा कर दिया है।
श्रद्धालुओं के लिए अब अल्मोड़ा स्थित जागेश्वरधाम में भगवान का आशीर्वाद लेना भी महंगा हो गया है। मंदिर प्रबंधन समिति ने परिसर में पार्थिव पूजा शुल्क 11 गुना बढ़ाकर 51 रुपए से 551 रुपए निर्धारित कर दिया है।
दर्शन करते वक्त संकल्प पूजन के लिए भी 51 रुपए से लेकर 101 रुपए तक देने होंगे, जबकि पहले ऐसा कोई शुल्क ही नहीं था। मंदिर समिति के इस फैसले से श्रद्धालुओं और पुजारियों में काफी नाराजगी है।
पुजारियों का आरोप है कि इस कारण मंदिर में पार्थिव पूजन कराने वाले लोगों की संख्या काफी कम हो गई है और इससे मेले पर असर पड़ रहा है।
मालूम हो कि अमर उजाला की एक खबर का संज्ञान लेने के बाद 2014 में उच्च न्यायालय ने जागेश्वर मंदिर की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और चढ़ावे का हिसाब रखने के लिए मंदिर प्रबंधन समिति गठित करने का आदेश दिया था। इससे पहले मंदिर में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी और वहां चढ़ावे आदि का कोई हिसाब नहीं रखा जाता था।
हाई कोर्ट के आदेश पर बनी मंदिर प्रबंधन समिति का अध्यक्ष जिलाधिकारी और उपाध्यक्ष राज्यपाल द्वारा मनोनीत व्यक्ति होता है। एक वैतनिक प्रबंधक के अलावा तीन पुजारी समिति के सदस्य बनाए गए हैं।
इस समिति की सिफारिश के आधार पर पिछले साल मंदिर में महामृत्युंजय जाप सहित अन्य पूजा अर्चना के लिए शुल्क निर्धारित किया गया। महामृत्युंजय जाप का शुल्क मंत्रोच्चारण की संख्या के आधार पर 2500 रुपए से लेकर 25 हजार तक है। इसमें से 70 प्रतिशत राशि पुजारियों को बांटी जाती है।
पूजन का न्यूनतम शुल्क 551 रुपए
पिछले साल प्रबंधन समिति ने पार्थिव पूजन के लिए 51 रुपए शुल्क निर्धारित किया तो इसका काफी विरोध हुआ। तब समिति ने 51 रुपए की बाध्यता भी समाप्त कर दी थी, लेकिन मंदिर समिति ने हाल ही में पूजन शुल्क में परिवर्तन करते हुए पार्थिव पूजन का न्यूनतम शुल्क 551 रुपए कर दिया है।
इसके अलावा पूजन के वक्त संकल्प कराने के लिए भी 51 रुपए से लेकर 101 रुपए तक शुल्क कर दिया है, जबकि पहले ऐसा कोई शुल्क नहीं था।
पुजारी सहमत हों तो पार्थिव पूजन की दरें घटा देंगे: प्रबंधक
मंदिर प्रबंधन समिति के प्रबंधक प्रकाश भट्ट का कहना है कि पूर्व में पुजारियों की सहमति से ही पार्थिव पूजन का शुल्क बढ़ाया गया है।
अगर पुजारियों को ऐतराज नहीं हो तो समिति को पार्थिव पूजन का शुल्क 551 के बजाय 51 रुपए करने में प्रबंधन समिति को आपत्ति नहीं है, लेकिन नियमानुसार पुजारी श्रद्धालुओं से अतिरिक्त कोई धनराशि नहीं ले सकेंगे।
पुजारियों ने कहा- आम सहमति से नहीं हुआ फैसला
पार्थिव पूजन और अन्य पूजा के शुल्क बढ़ाने पर जागेश्वर के पुजारियों ने भी विरोध किया है। जागनाथ मंदिर के पुजारी गिरीश भट्ट का आरोप है कि मंदिर प्रबंधन समिति ने पूजन का शुल्क अपनी मर्जी से बढ़ाया।
इसके लिए किसी की राय नहीं ली। वरिष्ठ पुजारी गोपाल दत्त भट्ट का कहना है कि इक्का दुक्का पुजारियों की राय लेकर दरें बढ़ा दी गईं। इससे श्रद्धालु परेशान हैं। पुजारी कमल भट्ट का आरोप है कि मंदिर समिति ने यह निर्णय आम सहमति से नहीं लिया। इस कारण मेले पर असर पड़ रहा है।