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गैरसैंण को राजधानी नहीं तो जिला ही बना दो सरकार
गैरसैंण से विनय बहुगुणा
Updated Thu, 17 Nov 2016 07:49 PM IST
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भराड़ीसैण में शुरू हुए विधानसभा सत्र को लेकर गैरसैंणवासियों में उल्लास देखने को मिल रहा है। सत्र में गैरसैंण के लिए हरीश रावत अपनी पोटली से क्या तोहफा देते हैं इसको लेकर लोगों में चर्चा है।
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गैरसैंण उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा रहा है। पिछले चार वर्षों में कांग्रेस सरकार ने यहां कैबिनेट बैठक से लेकर दो विधानसभा सत्र और विधान सभा भवन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। इसके बावजूद गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनने का इंतजार आज भी है। इन सब के बीच गैरसैंण जिले की मांग भी पुरजोर उठ रही है।
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आदिबदरी के बलवंत सिंह नेगी कहते हैं कि सरकार राजधानी नहीं तो जिला ही दे दे। विकास के नाम पर राजनेताओं की फौज समय-समय पर गैरसैंण की वादियों में उतर रही है, लेकिन चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात की कहानी साबित हो रही है। ऐसे में अब जनता गैरसैंण को लेकर ठोस निर्णय चाहती है।
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माईथान संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह कहते हैं कि गैरसैंण में आज भी जरूरी सुविधाएं खानापूर्ति बनी हैं। कस्बे का सीएचसी पीपीपी मोड में होने के कारण रोना रो रहा है। वहीं बिजली, पानी, सड़क शिक्षा व संचार जैसी सुविधाएं आज भी ढर्रे पर नहीं लौट पाई हैं। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रही हैं, वहीं, भराड़ीसैंण के पशु प्रजनन केंद्र की सुध नहीं ली जा रही है।
सरकार को जनहितों को देखते हुए कम से कम गैरसैंण जिले का पुनर्गठन कर देना चाहिए। गजेंद्र नौटियाल का कहना है कि अब जनता के सब्र को बांध टूट रहा है। आश्वासनों से विकास नहीं होता। गैरसैंण को राजनीति का मुद्दा बनाने वाली सरकारों को उसका मान सम्मान दिलाना होगा।