फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Protest Against uttarakhand Chardham shrine board

श्राइन बोर्ड के विरोध में तीर्थ पुरोहित, कहा विश्वास में लिए बिना सदन में नहीं आना चाहिए विधेयक

Sun, 01 Dec 2019 10:17 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 01 Dec 2019 10:17 AM IST
सार

  • संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक से मिला तीर्थ पुरोहितों का प्रतिनिधिमंडल
  • कौशिक ने सीएम से बात करने का आश्वासन दिया, सुझाव देने को भी कहा
  • विधानसभा घेराव और सीएम आवास कूच की तैयारी शुरू की पुरोहितों ने
  • चारों धामों के पुरोहित परिवारों और पंचायतों को देहरादून पहुंचने को कहा

विज्ञापन
Protest Against uttarakhand Chardham shrine board
संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

श्राइन बोर्ड के विरोध में मुखर तीर्थ पुरोहितों ने शनिवार को संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक से साफ कहा कि श्राइन बोर्ड विधेयक को किसी भी कीमत पर विधानसभा में पेश होने नहीं दिया जाए। विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास के घेराव के लिए तीर्थ पुरोहितों ने अब चारों धामों के पुरोहित परिवारों और समर्थकों को देहरादून पहुंचने के लिए भी कह दिया है। शनिवार को ही आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए कोर कमेटी का गठन भी कर दिया गया। 

विज्ञापन


कोर कमेटी के संयोजक सुरेश सेमवाल के नेतृत्व में तीर्थ पुरोहितों का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक से उनके यमुना कालोनी आवास पर मिला। सेमवाल के मुताबिक संसदीय कार्यमंत्री को यह साफ बता दिया गया है कि श्राइन बोर्ड विधेयक को किसी भी कीमत पर विधानसभा में पेश नहीं किया जाए।
विज्ञापन


सदन में यह विधेयक तीर्थ पुरोहितों को विश्वास में लिए बिना नहीं रखा जाना चाहिए। मदन कौशिक ने तीर्थ पुरोहितों को मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया और कहा कि पुरोहित अपने सुझाव सरकार को दे सकते हैं। सेमवाल के मुताबिक पुरोहितों ने सुझाव देने से साफ मना कर दिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसी के साथ तीन दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास और चार दिसंबर को विधानसभा घेराव के लिए चारो धामों के पुरोहित परिवारों और अन्य समर्थकों को देहरादून पहुंचने को भी कहा गया है। देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी के मुताबिक चारों धामों में 25 हजार से अधिक परिवार तो सिर्फ तीर्थ पुरोहितों के ही हैं। सिर्फ बदरीनाथ में ही हकदारों की 33 से अधिक पंचायतें हैं। 

चारों धामों की अपनी अलग-अलग मान्यताएं, एक एक्ट कैसे

महामंत्री हरीश डिमरी के मुताबिक चारों धामों की अपनी विशिष्ट पूजा पद्धतियां हैं। धार्मिक से लेकर अन्य मान्यताओं में भी अंतर है। एक ही अधिनियम से इन चारों धामों का संचालन कैसे किया जा सकता है। बड़ी बात यह है कि  सरकार ने पुरोहितों को विश्वास में लिए बिना ही यह विधेयक लाने का फैसला किया है। सरकार पहले श्राइन बोर्ड को लेकर सबकी सहमति ले। 

कोर कमेटी का गठन, सुरेश सेमवाल संयोजक

आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए महापंचायत ने सुरेश सेमवाल को संयोजक बनाते हुए कोर कमेटी का गठन कर दिया है। कोर कमेटी मेें विनोद शुक्ला, कृष्णकांत कोठियाल, हरीश डिमरी, लक्ष्मी नारायण जुगरान, संजीव सेमवाल, जगमोहन उनियाल, कृतेश्वर उनियाल, बृजेश सती, रविंद्र सेमवाल, उमेश सती आदि को शामिल किया गया है।
 

उक्रांद ने किया चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन का विरोध 

उत्तराखंड क्रांति दल ने चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन का विरोध करते हुए इसके खिलाफ चार दिसंबर को प्रदेश भर में धरने का एलान किया है। वहीं इस दिन दल के केंद्रीय संरक्षक त्रिवेंद्र पंवार भराड़ीसैंण में 24 घंटे के उपवास पर बैठेंगे। दल के केंद्रीय संरक्षक ने शनिवार को दल के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया से वार्ता में कहा कि उत्तराखंड में तीर्थ पुरोहितों के हक-हकूकों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। सरकार श्राइन बोर्ड को खत्म करे। 

दल के केंद्रीय संरक्षक ने कहा कि सरकार पंडा पुरोहितों के हक हकूकधारियों और अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार ने पहाड़ के मंदिरों को इसमें शामिल किया है। जबकि नीलकंठ और मंसा देवी मंदिर को इससे अलग रखा गया है। मीडिया से वार्ता के दौरान दल के केंद्रीय संरक्षक भाजपा और कांग्रेस दोनों पर जमकर बरसे।

उन्होंने कहा कि जब तक कांग्रेस सत्ता में रही तब तक गैरसैंण उसके लिए गैर रहा, लेकिन विपक्ष में आते ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को गैरसैंण अपुणसैंण नजर आने लगा है। ठीक यही स्थिति भाजपा की है।

भाजपा गैरसैंण को लेकर कई दावे करती रही है, लेकिन वर्तमान में उसकी ओर से किए गए सभी दावे भुला दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन दलों के लिए गैरसैंण मात्र एक राजनीतिक मुद्दा है। गैरसैंण में अधिक ठंड लगने की बात पर उन्होंने कहा कि इस तरह के लोग उत्तराखंड की राजनीति से सन्यास लें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed