अलकनंदा प्रोजेक्ट: टरबाइन घूमी, पैदा होने लगी बिजली
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10 अप्रैल रात से श्रीनगर स्थित अलकनंदा जल विद्युत परियोजना से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। परियोजना से हर घंटे औसतन प्रति घंटा 68 मेगावाट (68 हजार किलोवाट) बिजली मिल रही है।
अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ने पर एक टरबाइन की अधिकतम क्षमता के अनुसार 82.5 मेगावाट बिजली मिलेगी। वहीं परियोजना की दूसरी टरबाइन से भी विद्युत उत्पादन शुरू होने लगेगा।
330 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना की टरबाइनों की चार्जिंग और टेस्टिंग के बाद जीवीके/एएचपीसीएल की ओर से बृहस्पतिवार देर रात से विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। प्रथम चरण में एक टरबाइन से विद्युत उत्पादन चालू किया गया।
इसके लिए टरबाइन से पैदा हो रही बिजली और ग्रिड से आ रही बिजली को 400 केवी में सिंक्रोनाइज (समक्रमिक) किया गया। इसके बाद स्विच यार्ड में ग्रिड से विद्युत लाइन जोड़ दी गई।
टरबाइन की क्षमता का टेस्ट हुआ सफल
शुक्रवार तड़के तीन से पांच बजे तक प्रति घंटे 15 मेगावाट की दर से विद्युत उत्पादन हुआ, लेकिन अचानक लाइन ने ट्रिप ले ली।
शुक्रवार दिन से इंजीनियरों से दोबारा से टरबाइन चलाकर सिंक्रोनाइज किया। रात लगभग 12.30 बजे तक इसे ग्रिड से जोड़ दिया गया। इंजीनियरों ने टरबाइन की अधिकतम क्षमता को भी परखा। यह परीक्षण सफल रहा। टरबाइन ने अधिकतम उत्पादन क्षमता 82.5 मेगावाट को क्रास कर लिया। जिस पर इंजीनियरों ने राहत की सांस ली।
इनका है कहना
परियोजना की एक टरबाइन से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। जैसे-जैसी बर्फ गलने लगेगी, पानी बढ़ता जाएगा। अन्य टरबाइनों से भी उत्पादन बढ़ता जाएगा।
-आरएस चौहान, जनसंपर्क अधिकारी, एएचपीसीएल श्रीनगर