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उत्तराखंड में सैकड़ों किमी प्रस्तावित सड़कों पर लटकी तलवार

Fri, 22 Sep 2017 01:07 PM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 22 Sep 2017 01:07 PM IST
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problem in uttarakhand road construction
uttarakhand forest

राज्य में सैकड़ों किलोमीटर प्रस्तावित नई सड़कों पर तलवार लटक गई है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय शर्तें पूरी न होने पर वन भूमि हस्तांतरण के 83 प्रस्तावों को रद्द करने जा रहा है।

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इन प्रस्तावों में से 36 सड़कों और अन्य पेयजल समेत दूसरी योजनाओं से जुड़े हैं। हैरत की बात है कि इन प्रस्तावों को पांच साल पहले सैद्धांतिक मिल चुकी थी, लेकिन अंतिम सहमति के लिए विभागों की ओर से अब तक शर्तें पूरी नहीं की गईं। इस लापरवाही के चलते केंद्रीय मंत्रालय ने प्रस्ताव रद्द करने संबंधी नोटिस भेजा है।
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राज्य में विभिन्न योजनाओं के लिए लोक निर्माण विभाग, पेयजल समेत 16 विभागों ने वन भूमि की मांग की थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने जमीन देने के लिए सैद्धांतिक सहमति जता दी, लेकिन सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद विभागों ने लापरवाह रुख अपना लिया। अंतिम सहमति मिलने के लिए जो भी केंद्रीय मंत्रालय की शर्त होती है, उसे पूरा ही नहीं किया गया।
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केंद्रीय मंत्रालय ने ऐसे 83 मामलों का पांच साल तक इंतजार किया और कोई प्रगति न होती देख अब इन प्रस्तावों को खारिज करने की तैयारी कर ली है। इस मामले में केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य के नोडल अधिकारी वन भूमि हस्तांतरण कार्यालय को बाकायदा नोटिस भेजा है। इसके बाद शासन तक खलबली मच गई। इनमें सबसे ज्यादा 29 मामले लोक निर्माण विभाग के हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तीन और बीआरओ के 4 मामले हैं। इसके अलावा पेयजल योजनाओं के भी 12 प्रस्ताव हैं।

अब शासन केंद्रीय मंत्रालय से कुछ मोहलत मांगकर वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी शर्तों और औपचारिकताओं को पूरी करने की गुहार लगाने की तैयारी में है, जिससे किरकिरी से बचा जा सके। बताया जा रहा है कि इसे लेकर मुख्य सचिव ने वन भूमि की मांग करने वाले विभागों के अधिकारियों से कड़ी नाराजगी जताई है। इसके बाद महकमों ने दौड़-भाग शुरू कर दी है।

इन विभागों के थे प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, बीआरओ, पेयजल, राजस्व, पिटकुल, सिंचाई, टूरिज्म, परिवहन, स्वास्थ्य, पुलिस, आर्मी, सेल्स टैक्स, नगर निकाय, मंडी परिषद और निजी प्रस्ताव शामिल थे।

पांच साल से जिन प्रस्तावों पर कोई प्रगति नहीं हुई है, उन प्रस्तावों को रद्द करने का नोटिस केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दिया है। प्रयास किया जा रहा है कि प्रस्ताव को खारिज होने की स्थिति न आए।

-विनोद सिंघल, एपीसीसीएफ व नोडल अधिकारी वन भूमि हस्तांतरण

यह बात सही है कि प्रस्ताव खारिज होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। प्रयास किया जाएगा कि जो भी वन भूमि हस्तांतरण को लेकर तकनीकी कमियां है, उनको पूरा कर लिया जाए। इसमें भी सड़क संबंधी उन प्रस्तावों के लिए जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जाएगा, जो अति आवश्यक हैं। 
-ओमप्रकाश, अपर मुख्य सचिव

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