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अब प्राइवेट फर्म करेगी गंगा को प्रदूषण मुक्त
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 30 Oct 2015 03:31 PM IST
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गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की जिम्मेदारी अब एक प्राइवेट फर्म के हाथों में आ गई है। एनजीटी की ओर से किए गए सवालों के बाद शासन ने पेयजल निगम से यह कार्य छीन लिया है।
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दो सालों से हरिद्वार, ऋषिकेश और मुनिकीरेती में 416 करोड़ के जिन कार्यों को लेकर पेयजल निगम कसरत कर रहा है उनकी डीपीआर भी उनसे ले ली गई है। यही नहीं कार्य योजनाओं की पहली किश्त भी कंपनी के नाम करने के आदेश हो गए हैं।
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एनजीटी की ओर से राज्य सरकार से लगातार यह सवाल किए जा रहे हैं गंगा को प्रदूषण मुक्त किए जाने के लिए क्या काम किए जा रहे हैं? वहीं, गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए पेयजल निगम की ओर से तैयारी की जा रही थी।
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गंगा के आसपास बनने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर निगम डीपीआर तैयार करने के बाद बजट के इंतजार में था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। कुछ दिन पहले मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने गंगा को प्रदूषण मुक्त किए जाने संबंधी सभी कार्यों को एक प्राइवेट फर्म (इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड) को दे दिए।
इतना ही नहीं हरिद्वार में 40 एमएलडी प्लांट के लिए दिए जाने वाले 77.41 करोड़ रुपए भी इसी फर्म को देने के आदेश हो गए हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश और मुनिकीरेती में सीवरेज को लेकर 416.65 करोड़ के सभी काम अब यही फर्म करेगी।
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भले ही शासन को प्राइवेट फर्म पर भरोसा हो लेकिन निगम अधिकारियों को इससे बड़ा झटका लगा है। खुलकर तो कोई इस बारे में कुछ नहीं बोल रहा है लेकिन दबी जुबान में हर कोई इसके खिलाफ है।
निगम अधिकारियों का कहना है कि निगम सेंटेज बेस है। जब हमें काम ही नहीं मिलेंगे तो भला सैलरी कैसे मिलेगी। ऐसे में तो निगम का राजकीयकरण और भी आवश्यक हो जाता है।
मुझे इस मामले में अधिक जानकारी नहीं है। यह मुख्य सचिव का निर्णय है। उन्हें जो सही लगा, उन्होंने किया। जहां तक पेयजल निगम के कार्यों की बात है तो उनमें मुझे तो कोई कमी नहीं लगती।
- एस राजू, अपर मुख्य सचिव