देश में पहली बार बनेगा 'स्मार्ट ग्राम', दून में राष्ट्रपति रखेंगे नींव
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शहरीकरण का दबाव झेल रहे ग्रामीण परिवेश की सादगी के साथ आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्मार्ट ग्राम मॉडल की शुरूआत देहरादून स्थित प्रेसीडेंट एस्टेट से होगी। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी 27 सितंबर को दून पहुंच रहे हैं, जिस दौरान प्रेसीडेंट एस्टेट में बतौर स्मार्ट ग्राम मॉडल की नींव रखेंगे। स्मार्ट ग्राम कम लागत के सेनिटेशन इंटिग्रडेट कॉम्यूनिटी हाउसिंग सिद्धांत पर आधारित है। इस पर पहली बार देश में काम हो रहा है। 12 आवासीय यूनिट का एक मॉडल राजपुर रोड स्थिति प्रेसीडेंट एस्टेट में बनाए जाने हैं।
प्राशक टेक्नो इंटरप्राइजेज की यह पेटेंट टेक्नोलॉजी है, जिसमें निर्मित होने वाले भवन हर तरह की आपदा को सहने के साथ विकसित होने वाले क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाएंगे। स्मार्ट ग्राम का सिद्धांत स्मार्ट सिटी योजना से पूरी तरह अलग है। स्मार्ट ग्राम में टेक्नोलॉजी का उतना समावेश है जिससे वहां के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
विकसित होने वाले स्मार्ट ग्राम रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को ध्यान में रखकर बना है। राष्ट्रपति भवन में स्मार्ट ग्राम की प्रस्तुति के बाद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की सैद्धांतिक सहमति के बाद प्रेसीडेंट एस्टेट देहरादून में मॉडल विकसित करने की अनुमति मिली है। अब राष्ट्रपति 27 सितंबर से 30 सिंतबर तक के लिए दून स्थित प्रेसीडेंट एस्टेट में प्रवास करेंगे।
राष्ट्रपति भवन ने प्राशक की विकसित तकनीक को दी सहमति
प्राशक टेक्नो इंटरप्राइजेज के संस्थापक प्रभुल आर नाइक ने बताया कि हमारे मॉडल के टेस्ट के लिए उत्तराखंड सबसे अनुकूल हैं। स्मार्ट ग्राम पूरी तरह से आत्मनिर्भर मॉडल है जो हेबिटेक निवारा तंत्रा बिल्डिंग एंड सेनिटेशन टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन की तकनीक हमारी पेटेंट है।
इस मॉडल में नेचुरल सेनिटेशन टेकनीक, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोलर पावर आदि को शामिल किया है। लोग इनकम ग्रुप की हाउसिंग परियोजनाओं में यह बेहद कारगर है, जिससे महज 4.75 लाख रुपये में साढ़े तीन सौ वर्ग फीट से अधिक का आवास बन जाता है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी चार दिवसीय दून प्रवास के दौरान इसकी नींव रखेंगे, जिसके लिए तैयार गतिमान है।
स्मार्ट ग्राम
- आवासीय योजना के लिए ईंटे बनाए जाने के लिए उन्नत तकनीक
- स्थानीय लोग स्वयं बना पाएंगे ऐसी ईंटे
- भवन दीवारों पर प्लास्टर की जरूरत नहीं पड़ेगी
- भवन निर्माण का खर्च 20 से 30 प्रतिशत होगा कम
- सेनिटेशन में नोवेल एनारोविक बैफल रियक्टर होगी इस्तेमाल
- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा
- पेयजल और सिंचाई के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग तकनीक