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उत्तराखंडः जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संवर्ग को समाप्त करने की तैयारी, शिक्षा विभाग को मिले 444 प्रवक्ता
Tue, 30 Jul 2019 03:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
बिशन सिंह बोरा , अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा , अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 30 Jul 2019 03:01 PM IST
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विद्यालयी शिक्षा विभाग में अब 12500 शिक्षकों वाले जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संवर्ग को समाप्त करने की तैयारी है। शासन की ओर से इसका कार्यवृत्त जारी कर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से इसका प्रस्ताव मांगा गया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो विभाग में एक से पांच तक बेसिक और छह से इंटरमीडिएट तक माध्यमिक दो ही संवर्ग रह जाएंगे। विद्यालय शिक्षा विभाग में वर्तमान में बेसिक, जूनियर और माध्यमिक तीन संवर्ग हैं।
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शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, अपर सचिव रवनीत चीमा, अपर निदेशक महानिदेशालय वंदना गर्ब्याल सहित विभिन्न अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक का जो कार्यवृत्त जारी किया गया है, उसमें निदेशालय को निर्देशित किया गया है कि इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाए। इसके अलावा एक ही परिसर में चलने वाले जूनियर हाईस्कूल एवं माध्यमिक विद्यालयों को चिह्नित कर शासन के निर्देश के अनुसार विद्यालयों का एकीकरण किया जाए। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संवर्ग को समाप्त किया गया तो प्रदेश में 2200 जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कालेजों में मर्ज हो जाएंगे। शासन की ओर से पहले ही एक हजार से अधिक जूनियर हाईस्कूलों को हाईस्कूलों में अपग्रेड किया जा चुका है।
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शासन जूनियर हाईस्कूलों के मामले में 14 नवंबर 2016 के शासनादेश पर अमल करे या फिर केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर पीआरटी, पीजीटी एवं टीजीटी कैडर को लागू करे। इसके अलावा सीमैट, डायट, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय एवं शिक्षा महानिदेशालय को भी मर्ज कर केवल उन निदेशालयों को बनाए रखा जाए बहुत जरूरी हो।
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-राजेंद्र बहुगुणा, प्रदेश महामंत्री जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
विद्यालयी शिक्षा में दो संवर्गों के मामले को लेकर निदेशालय से प्रस्ताव मांगा है। इस मसले पर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ से भी वार्ता हुई है, शिक्षक भी चाहते हैं कि उन्हें माध्यमिक में शामिल किया जाए।
-आर मीनाक्षी सुंदरम, शिक्षा सचिव विद्यालयी शिक्षा
शिक्षा विभाग को मिले 444 प्रवक्ता, दुर्गम स्कूलों में की तैनाती
लोक सेवा आयोग से शिक्षा विभाग को 444 प्रवक्ता मिले हैं। विभाग की ओर से इन सभी को दुर्गम और अति दुर्गम स्कूलों में तैनाती दी गई है। इससे प्रदेश के दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या कुछ हद तक दूर हुई है। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर के मुताबिक विभाग को अभी कुछ और प्रवक्ता मिलने हैं। सभी प्रवक्ताओं को दुर्गम में भेजा जाएगा।
शिक्षा विभाग को लोक सेवा आयोग से महिला संवर्ग में 62 और सामान्य संवर्ग में 382 प्रवक्ता मिले हैं। अपर शिक्षा निदेशक रामकृष्ण उनियाल के मुताबिक विभाग की ओर से 917 प्रवक्ताओं के लिए लोक सेवा आयोग में अधियाचन किया गया था। आयोग से अब तक 444 प्रवक्ता मिल चुके हैं। नई नियुक्ति के इन सभी प्रवक्ताओं को चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, पौड़ी, रुद्रप्रयाग आदि पहाड़ के दूरदराज के दुर्गम और अति दुर्गम स्कूलों में भेजा गया है। अपर निदेशक के मुताबिक एलटी से प्रवक्ता पदों पर भी प्रमोशन की नई नियुक्ति के प्रवक्ताओं के बाद विभाग को प्रमोशन से 1949 और प्रवक्ता मिलने जा रहे हैं। लोक सेवा आयोग में सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ताओं के पदों के लिए डीपीसी चल रही है। आयोग से इन प्रवक्ताओं के मिलने पर इन्हें भी पर्वतीय जनपदों के स्कूलों में तैनाती दी जाएगी।
चार हजार से अधिक पद हैं रिक्त
शिक्षा विभाग में शिक्षकों के चार हजार से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। जिससे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। यही वजह है कि पिथौरागढ़ सहित कुछ जनपदों में अभिभावक शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। आयोग से नई नियुक्ति के इन प्रवक्ताओं के मिलने से विभाग ने भी कुछ हद तक राहत की सांस ली है।