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Dehradun News: फायर एनओसी के बिना चल रहा प्रेमनगर उप जिला अस्पताल
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प्रेमनगर उप जिला अस्पताल बिना फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के ही चल रहा है। अस्पताल प्रशासन ने फायर एनओसी के लिए 2022 में आवेदन किया था। दस्तावेज पूरे न होने के चलते अस्पताल को फायर एनओसी नहीं मिल पाई थी।
दो दिन पहले दिल्ली के शिशु केयर अस्पताल में आग लगने से सात नवजातों की मौत हो गई। इस हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। देहरादून के सरकारी और निजी अस्पतालों को भी इस हादसे से सबक लेने की जरूरत है। कई अस्पताल बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। इनमें प्रेमनगर उप जिला अस्पताल भी शामिल है। फायर एनओसी उन्हीं को मिलती है जिनके पास अग्निशमन यंत्र पूरे होते हैं।
प्रेमनगर अस्पताल में मरीजों का काफी दबाव रहता है। अग्निशमन सुरक्षा के मानक पूरे नहीं होने से अस्पताल को अबतक फायर एनओसी नहीं मिल सकी है। हालांकि अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएम शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में अग्निशमन यंत्र पूरे हैं। 2022 में फायर एनओसी के लिए आवेदन किया गया था। इस दौरान अस्पताल की बिल्डिंग का अप्रूव्ड नक्शा चाहिए था। इसके अलावा अग्निशमन यंत्रों की सूची भी मांगी गई थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने यह दस्तावेज फायर विभाग को उपलब्ध नहीं करवाए। ऐसे में अस्पताल में अबतक एनओसी नहीं मिल पाई है।
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दो दिन पहले दिल्ली के शिशु केयर अस्पताल में आग लगने से सात नवजातों की मौत हो गई। इस हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। देहरादून के सरकारी और निजी अस्पतालों को भी इस हादसे से सबक लेने की जरूरत है। कई अस्पताल बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। इनमें प्रेमनगर उप जिला अस्पताल भी शामिल है। फायर एनओसी उन्हीं को मिलती है जिनके पास अग्निशमन यंत्र पूरे होते हैं।
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प्रेमनगर अस्पताल में मरीजों का काफी दबाव रहता है। अग्निशमन सुरक्षा के मानक पूरे नहीं होने से अस्पताल को अबतक फायर एनओसी नहीं मिल सकी है। हालांकि अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएम शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में अग्निशमन यंत्र पूरे हैं। 2022 में फायर एनओसी के लिए आवेदन किया गया था। इस दौरान अस्पताल की बिल्डिंग का अप्रूव्ड नक्शा चाहिए था। इसके अलावा अग्निशमन यंत्रों की सूची भी मांगी गई थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने यह दस्तावेज फायर विभाग को उपलब्ध नहीं करवाए। ऐसे में अस्पताल में अबतक एनओसी नहीं मिल पाई है।
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