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Dehradun News: देवता की पालकी को कंधा लगाकर सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना
Thu, 15 May 2025 01:57 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Thu, 15 May 2025 01:57 AM IST
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तहसील क्षेत्र के बुलावलिया थात में बुधवार को पांचोई मेला आयोजित किया गया। विशलाड़ खत के कई गांवों के निवासियों ने नाणसा स्थित मंदिर में जमा होकर देवता की पूजा-अर्चना की। अलग-अलग गांवों से आए ग्रामीणों ने लोक संस्कृति पर आधारित गीत व नृत्यों की शानदार प्रस्तुति भी दी।
खत विशलाड़ के ग्राम जोगियो, सिनोग, सेजाड़, थणता आदि गांवों के ग्रामीण जोगियो गांव स्थित नाणसा मंदिर में एकत्रित हुए। यहां उन्होंने देवता की पालकी को कंधा लगाकर अपने परिवार, नाते, रिश्तेदार व क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
इसके बाद ग्रामीणों ने अपने साथ लाए वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊ, रणसिंघा आदि के साथ लोक गीत व नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने सबसे पहले जौनसार बावर क्षेत्र के आराध्य देव महासू देवता की हारुल पर लोक नृत्य किया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आई। इसके पश्चात उन्होंने जैंता, रासो आदि लोक नृत्य में प्रतिभाग किया।
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देवता के पुजारी राजेंद्र जोशी, जोगियो गांव के स्याणा संदीप चौहान ने बताया कि प्रत्येक वर्ष जेठ माह की संक्रांति के दिन पांचोई मेले का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। उन्होंने बताया कि पांचोई मेले को देखने के लिए बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी शामिल होते हैं। इस अवसर पर देवमाली, उदय सिंह चौहान, सूर्यपाल चौहान, कृपा राम शर्मा, भीमदत्त, चमन सिंह, सुल्तान सिंह आदि मौजूद रहे।
खत विशलाड़ के ग्राम जोगियो, सिनोग, सेजाड़, थणता आदि गांवों के ग्रामीण जोगियो गांव स्थित नाणसा मंदिर में एकत्रित हुए। यहां उन्होंने देवता की पालकी को कंधा लगाकर अपने परिवार, नाते, रिश्तेदार व क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
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इसके बाद ग्रामीणों ने अपने साथ लाए वाद्य यंत्र ढोल-दमाऊ, रणसिंघा आदि के साथ लोक गीत व नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने सबसे पहले जौनसार बावर क्षेत्र के आराध्य देव महासू देवता की हारुल पर लोक नृत्य किया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आई। इसके पश्चात उन्होंने जैंता, रासो आदि लोक नृत्य में प्रतिभाग किया।
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देवता के पुजारी राजेंद्र जोशी, जोगियो गांव के स्याणा संदीप चौहान ने बताया कि प्रत्येक वर्ष जेठ माह की संक्रांति के दिन पांचोई मेले का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। उन्होंने बताया कि पांचोई मेले को देखने के लिए बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी शामिल होते हैं। इस अवसर पर देवमाली, उदय सिंह चौहान, सूर्यपाल चौहान, कृपा राम शर्मा, भीमदत्त, चमन सिंह, सुल्तान सिंह आदि मौजूद रहे।