प्रह्लाद कक्कड़: ‘विज्ञापन एकमात्र पेशा, जहां महिलाओं को मिलती है पुरुषों से ज्यादा तनख्वाह’ पढ़िए विज्ञापन गुरु ने क्यों कहा ऐसा?
दिग्गज लेखकों, कथाकारों, साहित्यकारों के संगम का प्रतीक देहरादून लिटरेचल फेस्टिवल के चौथे संस्करण के दूसरे दिन कई हस्तियों ने अलग-अलग विषय पर अपने विचार रखे। विज्ञापन गुरु प्रह्लाद कक्कड़ ने कहा, महिलाएं मल्टीटास्किंग, जबकि पुरुषों में अहंकार की बहुत बड़ी समस्या है।
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‘विज्ञापन एकमात्र ऐसा पेशा है, जहां महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा सैलरी दी जाती है।’ यह बातें विज्ञापन गुरु प्रह्लाद कक्कड़ ने लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन कहीं। फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण इम्तियाज अली खान रहे। ऋचा अनिरुद्ध से बातचीत के दौरान उन्होंने म्यूजिकल फिल्म ‘जीना अभी बाकी है’ की स्क्रीनिंग भी की।
चेंजिंग फेस ऑफ एडवरटाइजिंग सत्र पीयूष पांडे और प्रह्लाद कक्कड़ की दिलचस्प बातों ने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपनी नई किताब ‘ओपन हाउस’ के बारे में बात करते हुए पीयूष पांडे ने कहा कि यह किताब उन हजारों सवालों का जवाब है, जो मुझसे हर उस जगह पर पूछे जाते थे जहां मैं जाता हूं।
उन्होंने कहा कि यह किताब नई पीढ़ियों को इस तरह से प्रेरित करने का एक प्रयास है कि कुछ भी असंभव नहीं है, यदि आप अपनी आंखें और कान खुले रखें और दिल की आवाज को सुनें। प्रह्लाद कक्कड़ ने विज्ञापन में लिंग विविधता पर कहा कि महिलाओं में प्राकृतिक सौंदर्यशास्त्र होता है और वह मल्टीटास्किंग भी अच्छी होती है जबकि पुरुषों में अहंकार की बहुत बड़ी समस्या होती है।
‘द हिडन हिंदू’ पर आयोजित चर्चा में दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई
अक्षत की किताब ‘द हिडन हिंदू’ पर आयोजित चर्चा में दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई। अक्षत ने कहा कि मेरे लिए इस पुस्तक को लिखना एक जीवन भर का अनुभव था। उन्होंने कहा कि इससे कुछ भी मेल नहीं खाएगा क्यों मैंने तब लिखना शुरू किया था जब मुझे मेरे जीवन में सब खत्म होता नजर आ रहा था। इस पुस्तक और इस कहानी के विचार ने मुझे मेरे जीवन के सबसे बुरे दौर से बाहर निकाला है। इसके बाद आरती सुनावाला, अंजना बसु और नयनिका महतानी के बीच ‘स्टोरीज आर द ब्रिज टू आर्ट एंड कल्चर’ पर एक सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन चेतन वोहरा ने किया गया।
करियर ऑफ द फ्यूचर सत्र भी भाया
करियर के प्रति उत्साही लोगों के साथ करियर्स ऑफ द फ्यूचर नामक एक दिलचस्प सत्र आयोजित हुआ। इसमें ऋचा द्विवेदी, वासु एडा, अंकित गुप्ता और राहुल नार्वेकर ने दर्शकों से काफी दिलचस्प बातें साझा की। सत्र का संचालन स्वरलीन कौर ने किया। अंकित ने कहा कि सफल करियर वह है, जहां कोई एक अद्वितीय प्रतिभा खोजने में सक्षम हो और समझ सके कि वह इस प्रतिभा के साथ समाज में कैसे योगदान दे सकता है।
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शेक्सपियर जिंदा होते तो मसाला सिनेमा के लिए लिख रहे होते
मसाला शेक्सपियर शीर्षक से सत्र में जोनाथन गिल हैरिस ने सिद्धार्थ जैन के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि अगर शेक्सपियर आज जिंदा होते तो मसाला सिनेमा के लिए लिख रहे होते न कि बॉलीवुड या हॉलीवुड के लिए। ऑन द ट्रेल ऑफ बुद्धा एंड लैंड ऑफ गॉड्स सत्र में दीपांकर एरोन और अर्जुन कादियान पैनेलिस्ट के रूप में उपस्थित रहे। सत्र का संचालन अनीषा गुप्ता ने किया।