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'बीपीएल कार्ड दे दो वरना दे दूंगा जान'
अमर उजाला, रुड़की
Updated Thu, 23 Jan 2014 07:42 PM IST
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सरकारी तंत्र लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए कितना संजीदा है। इसका अहसास नगर के किशोर सिंह से मिलकर किया जा सकता है।
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किशोर सिंह का बीपीएल राशन कार्ड ढाई साल बाद भी नहीं बन पाया है, यह हाल तब है जब लेखपाल से लेकर एसडीएम तक कार्ड बनाए जाने के आदेश कर चुके है।
कार्ड के लिए तहसील में हंगामा
बृहस्पतिवार को तहसील में ही सिस्टम से पीड़ित किशोर सिंह का सब्र का बांध टूट पड़ा। उन्होंने तहसील में हंगामा करते हुए रो-रो कर अधिकारियों से साफ कह दिया कि साहब अब भी अगर मेरा कार्ड नहीं बना तो में जान दे दूंगा।
अनुसूचित जाति का है पीड़ित
अर्धनग्न हालत में तहसील मुख्यालय पहुंचे पश्चिमी अंबर तालाब निवासी किशोर सिंह पुत्र साधुराम ने रो-रो कर बताया कि वह एक बहुत गरीब एवं बीमार अनुसूचित जाति का व्यक्ति है, पत्नी भी बीमार है। कार्ड बनाए जाने के लिए 24 जून 2011 में आवेदन किया था। अभी तक कार्ड नहीं बन पाया है।
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बीपीएल कार्ड नहीं बना होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकारी अस्पताल में भी डाक्टर मुफ्त इलाज करने के लिए बीपीएल कार्ड मांगते हैं।
अधिकारियों कर चुके हैं आदेश
आवेदन पर लेखपाल से लेकर तहसीलदार एवं एसडीएम तक बीपीएल राशन कार्ड बनाए जाने के लिए आदेश कर चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों के ढाई साल तक चक्कर काटने के बाद भी कार्ड नहीं बन पाया है। किशोर को हंगामा करते देख अधिकारी तुरंत हरकत में आए।
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नगर की क्षेत्रीय खाद्य आपूर्ति अधिकारी मुन्नी देवी ने सोमवार को हर हालत में पीड़ित का बीपीएल कार्ड बनाए जाने का आश्वासन दिया, तब जाकर पीड़ित शांत होकर घर को लौटा।