उत्तराखंड में नए जिलों के गठन पर चुनावी कदमताल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में नये जिलों के गठन का मुद्दा चुनावी कदमताल से आगे नहीं बढ़ पाया। राजनीतिक सियासी चौसर पर चाल पर चाल चल रहे हैं, मगर नये जिलों की राह खुलती नजर नहीं आ रही है। पहले पूर्व भाजपा सरकार ने यमुनोत्री, कोटद्वार, डीडीहाट और रानीखेत को जिला बनाने का शासनादेश जारी करके पहला सियासी कदम बढ़ाया तो कांग्रेस सरकार ने बजटीय प्रावधान और अब कारप्स फंड बनाकर दो कदम आगे चलकर सियासी फायदा लेने की कोशिश की।
भाजपा एक कदम तो कांग्रेस दो कदम
कांग्रेस पांच वर्ष तक जिलों के गठन का दम भरती दिखी, लेकिन अंतिम कैबिनेट में नये जिलों के गठन पर निर्णय लेने का साहस नहीं जुटा पाई। सरकार ने एक हजार करोड़ के कार्पस फंड का एलान कर सिर्फ चुनावी दांव चला है। हालांकि कैबिनेट से ऐन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय नए जिलों की घोषणा करने की मंशा से सीएम हरीश रावत से मिले। किशोर की मानें तो उन्हें ऐसी जानकारी मिली कि कतिपय मंत्री नये जिले बनाये जाने के पक्ष में नहीं हैं। अलबत्ता कैबिनेट के निर्णय को वह नये जिलों के गठन की दिशा में एक ठोस कदम करार दे रहे हैं।
मगर सियासी जानकार नये जिलों के गठन की दिशा में सरकार के निर्णय को चुनावी कदमताल करार दे रहे हैं। उनकी मानें तो ये मुद्दा सियासत की भेंट चढ़ गया। चूंकि कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में छोटी प्रशासनिक इकाइयों के गठन का वादा किया था और उसकी सरकार से नये जिले बनाये जाने की उम्मीद की जा रही थी, इसलिए संगठन इस मुद्दे को लेकर ज्यादा सीरियस है। यही कारण है कि कैबिनेट शुरू होने से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय मुख्यमंत्री से मिले और उनसे बैठक में नये जिलों के गठन को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की।
यह जानते हुये भी उन्होंने ये कोशिश की कि मुख्यमंत्री खुद कई बार नये जिलों के गठन की संभावना से इंकार कर चुके हैं। बहरहाल, इस दिशा में कैबिनेट का कॉरप्स फंड बनाने का निर्णय चुनावी ज्यादा माना जा रहा है। उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अब भी सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं और कह रहे हैं कि राज्य में यदि एक-दो दिन चुनाव आचार संहिता नहीं लगती है तो वह नये जिले बनाये जाने की मांग को लेकर एक बार फिर मुख्यमंत्री के पास जाएंगे।
मुख्यमंत्री को सौंपे पत्र में किशोर उपाध्याय ने अनुरोध किया कि कैबिनेट की बैठक में सरकार जिलों पर निर्णय लेगी तो इससे कांग्रेस के प्रति जनता में विश्वास कायम होगा। पार्टी ने 2012 के विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में छोटी व नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन का वादा किया है। नई तहसीलों, उपतहसीलों और निकायों का गठन के लिए सरकार बधाई की पात्र है। लेकिन नये जिलों का गठन भी किया जाना शेष है। चूंकि पार्टी ने जनता से चुनाव में वादा किया है। यदि कैबिनेट नये जिलों के गठन का निर्णय लेती है तो जनता का कांग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ेगा और वह एक बार फिर पांच साल के लिए पार्टी को सेवा का अवसर प्रदान करेगी।
भाजपा ने रखी सियासी प्रतिस्पर्धा की नींव
उत्तराखंड में नए जिलों के गठन के मुद्दे पर सियासी रंग चढ़ाने की शुरूआत भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार ने की। चुनाव से पहले जारी एक शासनादेश से खुद को नए जिलों का जनक साबित करने में भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। जब भी जिलों का मुद्दा उठा तो भाजपा उस शासनादेश का हवाला देकर श्रेय लेने की होड़ में दिखी। यह अलग बात है कि महज शासनादेश से कभी जिलों का गठन नहीं होता है।
जब भी नये जिलों के गठन की बात उठती भाजपा की छटपटाहट बढ़ने लगती है। भाजपा जानती है कि अगर सरकार चुनाव से ऐन पहले जिलों का गठन करती है तो उसका सियासी लाभ चुनाव में कांग्रेस को जा सकती है। ऐसे में नए जिलों के गठन की रेस में वह पिछड़ना नहीं चाहते। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने वर्ष 2011 में एक शासनादेश जारी कर रानीखेत, डीडीहाट, यमुनोत्री व कोटद्वार को जिला बनाया जाना प्रस्तावित किया था।
हालांकि उनके इस फैसलों को पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने आगे नहीं बढ़ाया। जानकारों की माने तो एक जिले के गठन में लगभग चार सौ करोड़ का अतिरिक्त राजस्व जुटाना होता है। ऐसे में चार जिलों के लिए 1500 करोड़ का प्रावधान होना चाहिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट सीएम रावत के फैसले को चुनावी दांव बता रहे हैं। वे बोले कार्पस फंड जैसी व्यवस्था से जिले नहीं बनते।
शासनादेश के बाद बना जिला पुनर्गठन आयोग
भाजपा चार जिलों के शासनादेश से वाहवाही लूटने में लगी रही तो कांग्रेस ने सरकार बनाते ही जिला पुनर्गठन आयोग गठित कर दिया है। पुनर्गठन आयोग ने सरकार को रिपोर्ट सौंप कर वही चार नाम सुझाए जो भाजपा के शासनादेश में शामिल थे। आयोग के निर्णय के बाद भी नए सीएम हरीश रावत आए तो नए जिलों की सूची में कई नाम और तैरना शुरू हो गए।
भट्ट ने बनाया पत्रों का रिकार्ड
जिलों को लेकर चुनावी जंग तो जारी है, लेकिन उसमें एक रिकार्ड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट के नाम एक ही मुद्दे पर सीएम को भेजा 478 अनुस्मारक का बन गया है। जब भी जिलों को लेकर कोई हलचल हुई तो भट्ट की ओर से कांग्रेस सरकार को एक पत्र जाता रहा। अब भाजपा अपने घोषणा पत्र में नए जिलों की गठन की बात लाने की तैयारी कर रही है।