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नहीं पूछा जा रहा है मुझेः हरीश रावत

Tue, 24 Sep 2013 03:09 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 24 Sep 2013 03:09 PM IST
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politics between vijay bahuguna and harish rawat

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत को प्रदेश सरकार के मुखिया विजय बहुगुणा त्रिशूल जरूर बता रहे हों पर रावत इससे खुश नहीं हैं।

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रावत की शिकायत है कि आपदा के बाद के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण जल संसाधन मंत्रालय को सरकार पूछ ही नहीं रही है। रावत के मुताबिक आपदा के बाद का हर काम प्रदेश की नदियों पर निर्भर करता है। पर प्रदेश का कोई नेता उन्हें यह बताने के लिए तैयार नही है कि आखिर प्रदेश की जरूरत क्या है।

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हाल ही में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत को त्रिशूल का एक शूल बताया था। पर रावत इससे सहमत नही है। रावत की शिकायत है कि उनके मंत्रालय से कोई बातचीत हो ही नहीं रही है। रावत जल संसाधन मंत्रालय संभालय संभाल रहे हैं और इस मंत्रालय का आपदा प्रबंधन से सीधा ताल्लुक है।
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नदियों के फ्लड जोन की मैपिंग का काम जल संसाधन मंत्रालय कर रहा है। रावत का कहना है कि जल्द ही यह काम भी पूरा हो जाएगा। फ्लड जोन मैपिंग के बाद ही यह तय हो सकेगा कि नदियों के किनारे कहां तक निर्माण कार्य कराया जा सकता है। दूसरी ओर मंत्रालय के जिम्मे अर्ली वार्निंग सिस्टम को विकसित करना भी है।

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बाढ़ की पूर्व सूचना देने का काम वैसे केंद्रीय जल आयोग का ही है। पर अचानक आने वाली बाढ़ के लिए आयोग के स्तर पर कोई तैयारी नहीं थी। अब आयोग इस काम को करने की तैयारी भी कर रहा है। जाहिर है कि यह काम उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पहले भी सामने आया है इस तरह का किस्सा
पहले भी इसी तरह से प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व आपस में टकराता रहा है। बाढ़ नियंत्रण के प्रस्तावों पर हरीश रावत ने साफ कहा था कि उनके मंत्रालय को प्रस्ताव नही मिले। आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य ने उस समय गिनाया था कि उनकी ओर से कई प्रस्ताव केंद्र को भेजे जा चुके हैं। बहरहाल यह एपिसोड आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला बन कर उभरा था।

प्रदेश को हो रहा है नुकसान

दो नेताओं की आपस की बयानबाजी से जाहिर है कि आपदा पर भी प्रदेश में सियासत हावी है। एक तरफ केंद्र से भरपूर मदद की अपेक्षा कर रही बहुगुणा सरकार जल संसाधन मंत्रालय को हरीश रावत केचलते उपेक्षित करने को विवश है। दूसरी तरफ रावत अपनी तरफ से प्रदेश में खुलकर आपदा प्रबंधन के काम में आगे नही आ पा रहे हैं। जाहिर हैकि इसका नुकसान प्रदेश को हो रहा है।

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