{"_id":"62b8ae2d761bf525427cb223","slug":"policy-side-jugaad-continues-to-stop-the-transfer-city-news-drn41565403","type":"story","status":"publish","title_hn":"नीति किनारे पर ट्रांसफर रुकवाने को पुलिस में जुगाड़ जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नीति किनारे पर ट्रांसफर रुकवाने को पुलिस में जुगाड़ जारी
विज्ञापन
20 साल बाद अस्तित्व में आई पुलिस तबादला नीति को कई पुलिसकर्मी किनारे रखकर जुगाड़ लगाने में जुटे हैं। नीति के तहत किए गए तबादले उन्हें मंजूर नहीं हैं। हाल ही में कुछ इंस्पेक्टरों के तबादले हुए तो उनमें से कई ने जैसे-तैसे जुगाड़ तंत्र में शामिल होकर अपनी रवानगी रुकवा ली। यही कारण है कि देहरादून में तीन कोतवालियों के लिए होने वाली पोस्टिंग को भी फिलहाल टाल दिया गया। इस बात की चर्चा है कि इनमें से अधिकतर का तबादला रुक भी सकता है।
करीब दो साल पहले पुलिस विभाग में नई तबादला नीति बनी थी। इसके तहत अराजपत्रित अधिकारी (इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर) मैदानी जिलों में आठ साल रह सकते हैं। जबकि, पहाड़ी जनपदों में यह अवधि चार साल है। हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल के लिए मैदान में क्रमश: 12 व 16 और पर्वतीय जनपदों में छह व आठ साल की अवधि तय की गई थी। यह दूसरा साल था, जब बड़े पैमाने पर तबादले किए गए।
शुरू में जब दरोगाओं, कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की तबादला लिस्ट जारी हुई तो उन्होंने जुगाड़ लगाने शुरू कर दिए। पहाड़ से बहुत से लोगों ने आने के लिए इनकार कर दिया। इस पर विभाग ने भी उन्हें राहत दे दी। क्योंकि, नीति में यह शामिल है कि पहाड़ में सेवा करने के इच्छुक को रिलीव नहीं किया जाएगा। जबकि, मैदान से जो लोग पहाड़ भेजे गए, उनमें से कुछ के जुगाड़ तो चले, लेकिन ज्यादातर को पहाड़ भेज दिया गया। इस बीच कुछ इंस्पेक्टरों का भी हरिद्वार और देहरादून से पहाड़ तबादला किया गया।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार, पहले वालों का जुगाड़ चला हो या नहीं पर इन तीन सितारा अधिकारियों का कामयाब हो गया। इनसे दो कोतवालियां देहरादून की भी खाली हो रही थीं। पुलिस कप्तान ने तारीख (24 जून) भी तय कर दिया था, लेकिन एकाएक सब कुछ रुक गया। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हरिद्वार और देहरादून के कर्मियों ने कई दरबारों की परिक्रमा कर तबादला रुकवा लिया। अब अधिकारिक आदेश होना बाकी है।
विज्ञापन
करीब दो साल पहले पुलिस विभाग में नई तबादला नीति बनी थी। इसके तहत अराजपत्रित अधिकारी (इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर) मैदानी जिलों में आठ साल रह सकते हैं। जबकि, पहाड़ी जनपदों में यह अवधि चार साल है। हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल के लिए मैदान में क्रमश: 12 व 16 और पर्वतीय जनपदों में छह व आठ साल की अवधि तय की गई थी। यह दूसरा साल था, जब बड़े पैमाने पर तबादले किए गए।
विज्ञापन
शुरू में जब दरोगाओं, कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की तबादला लिस्ट जारी हुई तो उन्होंने जुगाड़ लगाने शुरू कर दिए। पहाड़ से बहुत से लोगों ने आने के लिए इनकार कर दिया। इस पर विभाग ने भी उन्हें राहत दे दी। क्योंकि, नीति में यह शामिल है कि पहाड़ में सेवा करने के इच्छुक को रिलीव नहीं किया जाएगा। जबकि, मैदान से जो लोग पहाड़ भेजे गए, उनमें से कुछ के जुगाड़ तो चले, लेकिन ज्यादातर को पहाड़ भेज दिया गया। इस बीच कुछ इंस्पेक्टरों का भी हरिद्वार और देहरादून से पहाड़ तबादला किया गया।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार, पहले वालों का जुगाड़ चला हो या नहीं पर इन तीन सितारा अधिकारियों का कामयाब हो गया। इनसे दो कोतवालियां देहरादून की भी खाली हो रही थीं। पुलिस कप्तान ने तारीख (24 जून) भी तय कर दिया था, लेकिन एकाएक सब कुछ रुक गया। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हरिद्वार और देहरादून के कर्मियों ने कई दरबारों की परिक्रमा कर तबादला रुकवा लिया। अब अधिकारिक आदेश होना बाकी है।