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Dehradun News: पुलिस के पास होगा अपना डाटा सेंटर, आरएंडडी विंग भी बनेगा

Wed, 16 Oct 2024 03:11 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2024 03:11 AM IST
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Police will have its own data center, R&D wing will also be set up
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IIसाइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रस्ताव पुलिस ने किया तैयार, भेजेंगे शासन को
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I30 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया जाएगा सेंटर, डार्क वेब के रहस्य भी सुलझेंगे
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Iपुलिस आने वाले कुछ समय बाद डाटा बेस को सुरक्षित रखने के लिए किसी और एजेंसी पर निर्भर नहीं रहेगी। पुलिस के पास अपना डाटा सेंटर होगा। इसकी सुरक्षा के लिए पुलिस को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह सब व्यवस्थाएं पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में की जाएंगी।
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I30 करोड़ रुपये से अधिक की लागत में बनने वाले इस सेंटर में पुलिस कर्मचारियों को डार्क वेब के रहस्य सुलझाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। साथ ही पुलिस का रिसर्च एंड डवलपमेंट (आरएंडडी) विंग भी इस सेंटर में होगा। इसके लिए पुलिस ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। दरअसल, साइबर सुरक्षा इस वक्त बड़ा मुद्दा है। हाल ही में प्रदेश के डाटा सेंटर पर हुए हमले में सबसे अधिक पुलिस का सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ था। इसमें कुछ डाटा भी चोरी कर लिया गया था।
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Iपुलिस अपने महत्वपूर्ण डाटा को लेकर दूसरी एजेंसी पर ही निर्भर है, लेकिन कुछ समय बाद पुलिस अपने डाटा को अपनी ही निगरानी में सुरक्षित कर सकेगी। साथ ही डाटा ट्रांसफर की भी पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। गत जनवरी में इसके लिए साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने पर विचार हुआ था। शासन ने इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव मांगा था। जल्द ही इस प्रस्ताव को शासन में भेजा जाएगा। ताकि, जल्द से जल्द इस पर काम किया जा सके।
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Iसात करोड़ रुपये से खरीदे जाएंगे उपकरण
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Iडाटा सेंटर, फोरेंसिक लैब, ट्रेनिंग लैब आदि के लिए महंगे उपकरणों की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस बजट में से करीब सात करोड़ रुपये में उपकरणों की खरीद की जाएगी। इसके लिए भी कसरत शुरू कर दी गई है। इन सभी लैब और ट्रेनिंग मॉड्यूल को पुलिस के अधिकारी और साइबर एक्सपर्ट खुद संभालेंगे। ताकि, कोई डाटा सेंटर और डाटा ट्रांसफर व्यवस्था में सेंध न लगा सके। इसके लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

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Iचार विभाग होंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के
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I1. स्टेट ऑफ द आर्ट साइबर फोरेंसिक लैब : पुलिस साइबर, कंप्यूटर फोरेंसिक जांच भी अपने स्तर से कर सकेगी।
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I2. एडवांस साइबर ट्रेनिंग लैब : पुलिसकर्मियों को विश्वस्तरीय साइबर मामलों की विवेचना की ट्रेनिंग दी जाएगी।
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I3. डाटा सेंटर : पुलिस अपनी वेबसाइटों और एप का डाटा अपने इस डाटा सेंटर में ही स्टोर करेगी।
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I4. रिसर्च एंड डवलपमेंट विंग : इसके तहत पुलिस नए-नए टूल विकसित कर सकेगी, ताकि भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सके।
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Iये होंगे प्रमुख काम
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I- वर्तमान वेबसाइटों का रखरखाव बेहतर ढंग से होगा।
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I- डार्क वेब की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
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I- साइबर रिसर्च की जाएगी। साइबर क्राइम के नए तरीकों को समझकर उनके खिलाफ काम किया जाएगा।
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I- डाटा ट्रांसफर किस तरह से बेहतर किया जा सकता है, इसके लिए भी पुलिस को ट्रेनिंग दी जाएगी।
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Iसाइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए प्रस्ताव लगभग तैयार किया जा चुका है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम की चुनौतियों से निपटने की बेहतर ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही डाटा सेंटर आदि की व्यवस्थाओं को भी बेहतर किया जा सकेगा। - डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी कानून व्यवस्था एवं पुलिस प्रवक्ताI
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