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अब उधार नहीं रहेगी पुलिस की इनामी राशि
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देहरादून। किसी भी गुडवर्क पर पुलिस केे दिए जाने वाले इनाम की घोषणा अब सिर्फ कागजों में ही सिमट कर नहीं रहेगी। इनाम की धनराशि के लिए कोई अलग मद न होने के कारण अभीतक गुडवर्क पर घोषित होने वाली राशि उधार ही रह जाती है। बहरहाल, अब पुलिस मुख्यालय की ओर से इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
दरअसल, किसी भी घटना के खुलासे या अन्य किसी गुडवर्क के वक्त अलग-अलग स्तर से नकद पुरस्कार की घोषणा की जाती है। इनमें पुलिस कप्तान ढाई हजार, रेंज डीआईजी पांच हजार और पुलिस मुख्यालय (डीजीपी) को 20 हजार रुपये की घोषणा किए जाने का अधिकार है। अगर इस नकद पुरस्कार की बात करें तो यह नकद कभी कभार ही रहता है। जिला स्तर पर तो ढाई हजार के पुरस्कार अक्सर दे दिया जाता है, लेकिन मुख्यालय स्तर पर ऐसा न के बराबर ही होती है। पिछले दिनों डीजीपी अशोक कुमार ने भी इस मामले में चिंता जाहिर की थी। उन्होंने बताया कि मुख्यालय स्तर पर नकद पुरस्कार की घोषणा ही होती है, लेकिन यह दिया कभी नहीं जाता है। ऐसे में मुख्यालय में अब एक अलग से मद बनाने के लिए शासन से बात की गई है। पिछली बैठक में इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। अब जल्द ही इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
कई थाने भेज देते हैं, कई नहीं
जिला स्तर पर पुरस्कार की घोषणा के बाद कई थाने प्रस्ताव बनाकर भेज देते हैं। इससे कई बार ऐसा होता है कि यह पुरस्कार जिले में किसी मद से गुडवर्क करने वाली टीम को दे दिया जाता है। अधिकतर मामलों में संबंधित थाने से प्रस्ताव भेजा ही नहीं जाता है, क्योंकि धनराशि न मिलने की संभावना अधिक ही रहती है।
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दरअसल, किसी भी घटना के खुलासे या अन्य किसी गुडवर्क के वक्त अलग-अलग स्तर से नकद पुरस्कार की घोषणा की जाती है। इनमें पुलिस कप्तान ढाई हजार, रेंज डीआईजी पांच हजार और पुलिस मुख्यालय (डीजीपी) को 20 हजार रुपये की घोषणा किए जाने का अधिकार है। अगर इस नकद पुरस्कार की बात करें तो यह नकद कभी कभार ही रहता है। जिला स्तर पर तो ढाई हजार के पुरस्कार अक्सर दे दिया जाता है, लेकिन मुख्यालय स्तर पर ऐसा न के बराबर ही होती है। पिछले दिनों डीजीपी अशोक कुमार ने भी इस मामले में चिंता जाहिर की थी। उन्होंने बताया कि मुख्यालय स्तर पर नकद पुरस्कार की घोषणा ही होती है, लेकिन यह दिया कभी नहीं जाता है। ऐसे में मुख्यालय में अब एक अलग से मद बनाने के लिए शासन से बात की गई है। पिछली बैठक में इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। अब जल्द ही इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
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कई थाने भेज देते हैं, कई नहीं
जिला स्तर पर पुरस्कार की घोषणा के बाद कई थाने प्रस्ताव बनाकर भेज देते हैं। इससे कई बार ऐसा होता है कि यह पुरस्कार जिले में किसी मद से गुडवर्क करने वाली टीम को दे दिया जाता है। अधिकतर मामलों में संबंधित थाने से प्रस्ताव भेजा ही नहीं जाता है, क्योंकि धनराशि न मिलने की संभावना अधिक ही रहती है।
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