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डीजीपी के खिलाफ बागी तेवर, भुगतो खामियाजा

Tue, 22 Apr 2014 03:37 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 22 Apr 2014 03:37 PM IST
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police inspector nirvikar singh

नौकरशाह अपने हुक्म की नाफरमानी पर किस तरह अधीनस्थों पर कार्रवाई का चाबुक चलाते हैं।

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इनके हैं बागी तेवर
इसका अंदाजा पेड़ काटने के मामले में डीजीपी बीएस सिद्धू के खिलाफ बागी तेवर अपनाने वाले दरोगा निर्विकार सिंह की स्थिति देखकर लगाया जा सकता है।

डीजीपी के खिलाफ दारोगा के शपथपत्र दाखिल करते ही वरिष्ठ अफसरों को निर्विकार की लापरवाही नजर आ गई। उनकी छह पुरानी विवेचनाओं की फाइलें खोल दी गईं और सबकी प्रारंभिक जांच भी शुरू हो गई।

दारोगा पर ‘लगाम’ कसने की इस चुस्ती ने अफसरों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। राजपुर के वीरगिरवाली में गत वर्ष साल प्रजाति के कई हरे पेड़ काटे गए थे। मामले में डीजीपी बीएस सिद्धू का नाम सामने आया था।
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समन आए तो सिद्धू ने वन विभाग के कर्मचारियों और डीएफओ के खिलाफ षड्यंत्र रचने का केस राजपुर थाने में करा दिया था, जिसकी जांच विशेष जांच प्रकोष्ठ में उप निरीक्षक निर्विकार सिंह को सौंपी गई थी।
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अचानक दून से रुद्रप्रयाग ट्रांसफर
निर्विकार विभिन्न मामलों में जांच अधिकारी रहे और निष्पक्ष जांच के लिए जाने जाते हैं। कुछ समय बाद उन्हें अचानक दून से रुद्रप्रयाग ट्रांसफर कर दिया गया।

कुछ दिन पूर्व निर्विकार ने सीजेएम कोर्ट में दिए शपथपत्र में आरोप लगाया कि वरिष्ठ अफसरों की मर्जी के मुताबिक जांच न करने पर ही उनका तबादला किया गया।

निर्विकार ने शपथपत्र में यह भी कहा कि उनसे पहले भी इस मामले में कुछ जांच अधिकारियों पर अफसर गाज गिरा चुके थे। कुछ को निलंबित किया गया तो कुछ का तबादला हुआ।

अब निर्विकार के बागी तेवरों पर अचानक जल्दबाजी में उन छह मामलों की फाइल खोल दी गई है, जिनकी जांच उन्होंने की थी। उन पर जांच में लापरवाही का आरोप लगाया गया है।

लेकिन जल्दबाजी में अफसर भूल गए कि उनकी यह कार्रवाई निर्विकार के उस आरोप को ही पुष्ट करती है कि जांच मनमर्जी से न करने वालों पर गाज गिराई जा रही है। खास बात यह है कि फाइल निर्विकार के तबादले के चार माह बाद खोली गई हैं।

इनमें लापरवाही का आरोप
बहुचर्चित टीडीसी घोटाला, साउथ इंडियन बैंक के 34 करोड़ रुपए गबन का मामल, राज्य पुलिस प्राधिकरण के कार्यालय पर यूकेडी कार्यकर्ताओं का हंगामा, डालनवाला में 36 लाख का शेयर घोटाले के अलावा नेहरू कॉलोनी और राजपुर के दो मुकदमों में एसआई निर्विकार पर लापरवाही का आरोप है।

आरोप है कि निर्विकार ने जांच के लिए निर्धारित समय में प्रगति रिपोर्ट नहीं दी। संबंधित थानों को पुलिस उपाधीक्षक की ओर से जांच का आदेश भेजा गया है।

जांच से पहले हुआ ट्रांसफर
उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक गरमाने वाले टीडीसी घोटाले की जांच एसआई निर्विकार को सौंपी गई थी।

तब बहुगुणा सरकार ने इस जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा था। सीएम के निर्देश पर तत्कालीन डीजीपी सत्यव्रत ने निर्विकार को जिम्मा दिया था।

सूत्रों की मानें तो निर्विकार जांच लगभग पूरी कर चुके थे, लेकिन अचानक उनका स्थानांतरण हो गया। इसके बाद जांच विशेष जांच प्रकोष्ठ (एसआईएस) को सौंपी गई, लेकिन अगले ही दिन एसटीएफ को सुपुर्द कर दी गई।

आखिर ऐसी तेजी क्यों
सीओ से मिली रिपोर्ट के आधार पर छह विवेचनाओं में लापरवाही पर एसपी सिटी ने 15 अप्रैल को जांच की संस्तुति की।

इसी दिन यह फाइल एसपी सिटी से एसएसपी कार्यालय, वहां से डीआईजी कार्यालय और डीआईजी कार्यालय से रुद्रप्रयाग रवाना कर दी गई।

अगले ही दिन यह रिपोर्ट रुद्रप्रयाग भी पहुंच गई। 17 अप्रैल को एसपी ने आदेश दिया और 18 को सीओ ने प्रारंभिक जांच भी शुरू कर दी।

विवेचना में लापरवाही थी तो चार माह तक अफसर चुप क्यों रहे, डीजीपी के खिलाफ शपथपत्र देते ही फाइलें खोलना दुर्भावना की तरफ इशारा नहीं करता?

रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
एसआई निर्विकार के खिलाफ प्रारंभिक जांच कराए जाने की रिपोर्ट एसएसपी स्तर से मिली थी। हमारे कार्यालय से इसे रुद्रप्रयाग भेज दिया गया था। कार्रवाई एसएसपी से मिली रिपोर्ट के आधार पर ही की जा रही है। मुझे इससे ज्यादा कोई जानकारी नहीं है।

- अमित सिन्हा, डीआईजी

बदले की भावना भरा कदम

छह पुरानी विवेचनाओं में प्रारंभिक जांच साफ तौर से बदले की भावना भरी कार्रवाई है। राजपुर थाने की धारा 411 और 201 की जांच मुझे मिली ही नहीं थी तो इसमें मेरे स्तर पर कैसे लापरवाही हुई। वैसे भी मैं पहले ही हलफनामे में इस तरह की कार्रवाई की आशंका जता चुका हूं। एक ही दिन (15 अप्रैल) में सभी अफसरों द्वारा दी गई रिपोर्ट से जाहिर है कि उन पर भी दबाव रहा होगा।
- निर्विकार सिंह, एसआई, रुद्रप्रयाग

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