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मेयर की गिरफ्तारी के बाद दो दिनों तक राजनीतिक दबाव झेलती रही पुलिस
विशाल चौधरी, अमर उजाला, रुड़की
Updated Wed, 07 Mar 2018 11:13 AM IST
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yashpal rana
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मेयर यशपाल राणा की गिरफ्तारी प्रकरण को लेकर पुलिस प्रशासन दो दिन तक कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस का दबाव झेलता रहा।
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पुलिस ने दोनों ही दलों के नेताओं की सुनी और पुलिसिया इकबाल को भी अनाए रखा। पहले जहां तहरीर के आधार पर मेयर यशपाल राणा के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। वहीं दूसरी ओर भाजपा के तमाम दबाब के बाद मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धारा 307 हटाने में कोई देरी भी नहीं की।
मेयर प्रकरण में धारा 307 एक बड़ा विषय रहा है। सोमवार और मंगलवार को धारा 307 को लेकर जमकर राजनीति होती रही। यदि सोमवार की बात करें तो एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सोच थी कि मुकदमें से धारा 307 हटाकर मेयर को थाने से ही जमानत दिला दी जाएग। जिसके चलते सोमवार को कांग्रेस की ओर से पूर्णजोर प्रयास होता रहा। कई बार टकराव के आसार बनने के बाद भी पुलिस बैकफुट पर नहीं आई और पुलिस अपने निर्णय पर अटल रही।
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हालांकि भाजपा नेता धारा 307 कायम रहने को लेकर जोर आजमाइश कर रहे थे। पुलिस ने कांग्रेस के विरोध के चलते भी मेयर यशपाल राणा को जेल भेज दिया था। इसके दूसरी ओर मंगलवार को सप्लिमेंट्री मेडिकल रिपोर्ट में प्राणाधातक चोट नहीं आने के कारण पुलिस ने धारा 307 को मामले से हटा दी। देहरादून के चिकित्सकों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही धारा 325 बढ़ा दी गई है।
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मंगलवार को धारा 307 हटाएं जाने को लेकर भाजपा नेता पुलिस पर दबाओ बनाते रहे। जिसके चलते भाजपाईयों के फोन स्थानीय अधिकारियों से लेकर देहरादून में बैठे आला अधिकारियों तक को धनधनाते रहे, लेकिन पुलिस पर सत्ता का दबाओ भी नजर नहीं आया। एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि सप्लिमेंट्री मेडिकल रिपोर्ट में प्राणधातक चोट नहीं आने के कारण धारा 307 हटा दी गई है, वहीं धारा 325 बढ़ाई गई है।