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बार-बार बदल रही पुलिस की जांच रिपोर्ट
राकेश शर्मा/अमर उजाला, रुड़की
Updated Wed, 19 Feb 2014 10:35 PM IST
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पुलिस के खेल भी निराले हैं। जांच का ऊंट कब किस करवट बैठ जाए, कहना मुश्किल है। हत्या के प्रयास के एक मामले को एक साल पहले इंस्पेक्टर ने फर्जी बताते हुए वादी के खिलाफ ही कानून को गुमराह करने की कार्रवाई कर दी थी।
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अदालत के आदेश पर फिर हुई जांच में सहायक दारोगा ने पुरानी जांच को पलट कर मामले को सही बताया।
2012 में हत्या का है मामला
मामला झबरेड़ा थाना क्षेत्र के बेहडेकी सैदाबाद गांव का है। 2 जनवरी 2012 को विरोधियों द्वारा की गई मारपीट के बाद जगपाल ने खुदकुशी कर ली थी।
मृतक के भाई ब्रजमोहन ने चार लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज कराया था। अगले दिन आरोपी पक्ष के सचिन की तरफ से पीड़ित पक्ष पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी गई, लेकिन उस समय पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
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दूसरे पक्ष ने भी दर्ज किया मुकदमा
अदालत के आदेश पर एक साल बाद 24 जनवरी 2013 को दूसरे पक्ष की तरफ से चार लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप था कि हमला कर उनकी नाक की हड्डी तोड़ी गई।
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दो जांच में आई दो रिपोर्ट
मामले की जांच सहायक दारोगा गोवर्धन सैनी को सौंपी गई। विवेचना पर सवाल उठाए गए तो जांच अधिकारी बदल दिया गया। रुड़की, गंगनहर और ज्वालापुर तक जांच घूमती रही। डीआईजी के आदेश पर फिर यह जांच इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह नेगी को सौंपी गई।
नेगी ने जांच के बाद मुकदमे को झूठा करार दिया था। फाइनल रिपोर्ट लगाते हुए वादी के खिलाफ कानून को गुमराह करने रिपोर्ट भेज दी। अप्रैल माह में इस कार्रवाई के बाद अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
अदालत के आदेश पर फिर जांच हुई। सहायक दारोगा ने पुरानी जांच को पूरी तरह पलट दिया। जांच में आरोप को सही पाते हुए चार्जशीट लगा दी है। अब जाहिर है कि किसी न किसी जांच में खेल हुआ है।
चार्जशीट पर फिलहाल रोक
जांच का रुख बदला तो पीड़ित राजपाल त्यागी पक्ष ने बुधवार को एसपी देहात से मिलकर अपना दुखड़ा सुनाया। एसपी देहात ने फिलहाल चार्जशीट को रोकने के साथ तथ्यों की फिर से जांच कराने के लिए कहा है, ताकि हकीकत सामने आ सके।