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उत्तराखंड को झटका : उम्मीद थी मोदी कैबिनेट में दो मंत्रियों की, लेकिन मिला सिर्फ एक राज्यमंत्री

Thu, 08 Jul 2021 12:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 08 Jul 2021 12:00 PM IST
सार

विधानसभा चुनाव में वापसी करने का ख्वाब देख रही सत्तारूढ़ भाजपा के लिए चिंता का सबब यह होना चाहिए कि पिछले एक पखवाड़े में हुए सियासी उलटफेर से उसकी क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण गड़बड़ा गए हैं।

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PM Modi cabinet reshuffle : uttarakhand two ministers were expected but got only one minister of state
अजय भट्ट - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

चुनावी साल में उत्तराखंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में दो मंत्री बनाए जाने की उम्मीद कर रहा था। लेकिन उत्तराखंड के हिस्से में सिर्फ एक मंत्री आया और वह भी राज्यमंत्री।

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उत्तराखंड: अजय को मिला दो साल इंतजार का फल, भाजपा की कुमाऊं में 29 सीटों पर नजर
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इस बार कुमाऊं मंडल के ब्राह्मण नेता ऊधमसिंह नगर नैनीताल लोकसभा के सांसद अजय भट्ट को यह मौका मिला। लेकिन केंद्रीय कैबिनेट से शिक्षा जैसे अहम मंत्रालय से डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की विदाई के बदले एक और मंत्री न मिलना उत्तराखंड भाजपा के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
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मंत्रिमंडल विस्तारः पीएम मोदी की कैबिनेट में राज्य मंत्री बने सांसद अजय भट्ट, जानें उनके बारे में खास बातें...

विधानसभा चुनाव में वापसी करने का ख्वाब देख रही सत्तारूढ़ भाजपा के लिए चिंता का सबब यह होना चाहिए कि पिछले एक पखवाड़े में हुए सियासी उलटफेर से उसकी क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। दरअसल, पारंपरिक तौर पर  41 विधानसभा सीटों वाले गढ़वाल मंडल का पलड़ा भारी था। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री गढ़वाल से थे। लेकिन अब समीकरण एकदम उलट गए हैं। कुमाऊं के हिस्से में अब मुख्यमंत्री भी हैं और केंद्रीय राज्यमंत्री भी। 

संगठन और सरकार के गठन और जिम्मेदारियां बांटने में भाजपा क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखती है। सियासी जानकारों का मानना है कि 2022 के चुनाव से पहले उसे क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए उपाय करने होंगे।

हमेशा क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को महत्व दिया

राज्य गठन के बाद से भाजपा और कांग्रेस ने क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को हमेशा महत्व दिया है। दोनों दल पक्ष में रहे हों या विपक्ष में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बनाने में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को कभी नजरंदाज नहीं किया गया।

सांसद अजय भट्ट को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली है। इसके लिए उन्हें बहुत शुभकामनाएं। केंद्र सरकार में उनकी मौजूदगी का लाभ उत्तराखंड मिलेगा। इसमें किसी भी तरह के असंतुलन वाली बात नहीं है। विधानसभा चुनाव पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
-मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

गढ़वाल और कुमाऊं में विधानसभा सीटों का गणित
कुल विधानसभा सीटें :  70 
गढ़वाल मंडल में : 41 
कुमाऊं मंडल में : 29 
गढ़वाल के पर्वतीय जिलों में सीटें : 29 
कुमाऊं के पर्वतीय जिलों में कुल सीटें: 20 

बदले सियासी हालात में क्षेत्रीय संतुलन के समीकरण भी बदले

प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण बदल गए हैं। अब मुख्यमंत्री की कुर्सी कुमाऊं मंडल के खाते में है। लोस सांसद अजय भट्ट को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिल गई है। वह केंद्रीय मंत्री बनाए गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी गढ़वाल मंडल के हिस्से में है। हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक के हाथों में संगठन की कमान है। 

पहले गढ़वाल का पलड़ा भारी था
2017 में भाजपा की सरकार बनीं। भाजपा ने गढ़वाल मंडल से त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया। कुमाऊं मंडल के हिस्से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी गई। पार्टी ने अजय भट्ट के स्थान पर बंशीधर भगत को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 2019 में केंद्र में मोदी सरकार ने हरिद्वार के लोस सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनाया। तब पलड़ा गढ़वाल की ओर झुका था।

गढ़वाल के पहाड़ के हिस्से में अब क्या है?
सियासी हलकों में यह सवाल है कि क्षेत्रीय समीकरण के हिसाब गढ़वाल के पहाड़ के हिस्से में अब क्या है? गढ़वाल मंडल की कुल 41 में से 29 विस सीटों वाले पहाड़ के खाते में न मुख्यमंत्री है न केंद्रीय मंत्री। विधानसभा चुनाव से सिर्फ छह महीने दूर भाजपा क्षेत्रीय संतुलन की पहेली को कैसे साधेगी?

महाराज, हरक, धनसिंह का कद बढ़ाना क्या संतुलन की रणनीति है

जानकारों का मानना है कि प्रदेश में धामी सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. हरक सिंह रावत और डॉ. धन सिंह को लोनिवि, ऊर्जा व स्वास्थ्य सरीखे अहम मंत्रालय देने के पीछे क्षेत्रीय संतुलन की ही रणनीति है। ये तीनों मंत्री पौड़ी गढ़वाल जिले से हैं। 

ऊधमसिंह नगर को खास तरजीह देने की वजह
यह इत्तेफाक है या भाजपा की सियासी रणनीति, पार्टी ने ऊधमसिंह नगर जिले की खटीमा सीट के विधायक पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य को भी आबकारी विभाग दिया।

अब नैनीताल ऊधमसिंह नगर के लोस सदस्य अजय भट्ट को मोदी कैबिनेट में जगह दी। सियासी जानकार इसे किसानों को साधने की रणनीति मान रहे हैं। किसान आंदोलन को लेकर ऊधमसिंह नगर जिला खासा गरम रहा है।

...तो कहीं ये हरीश रावत की घेराबंदी की रणनीति तो नहीं

केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के बाद उत्तराखंड में इसके सियासी मायने ढूंढे जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कहीं ये हरीश रावत के घर में ही उन्हें घेरने की रणनीति तो नहीं। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले जैसा की सियासी फिजाओं में तैर रहा है, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक बार फिर से कांग्रेस का मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकते हैं। इसलिए भाजपा ने अभी से सियासी घेराबंदी शुरू कर दी है।

इन दिनों राज्य की राजनीति में पत्ता भी हिलता है तो हरीश रावत की प्रतिक्रिया तुरंत सामने आ जाती है। वह दिल्ली में हैं और वहीं से अपने ढंग से सियासी बैटिंग कर रहे हैं। यह बात और है कि अभी तक उनके घर (कांग्रेस) का मसला ही नहीं सुलझ पाया है। प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को लेकर मामला हाईकमान के दरबार में अटका है। सियासी जानकारों का मानना है कि इसकी वजह भी हरीश ही हैं। आने वाले चुनाव को देखते हुए वह हर चीज को अपने ढंग से फिट करना चाहते हैं। 

इधर, भाजपा ने पहले कुमाऊं से पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री का ताज और अब कुमाऊं से ही अजय भट्ट का कद बढ़ाकर साफ संकेत दे दिए हैं कि पार्टी हरीश के गढ़ में कहीं से भी खुद को कमजोर नजर नहीं आने देगी। 

कांग्रेस लगातार भाजपा पर कुमाऊं की उपेक्षा का आरोप भी लगाती रही है। लेकिन अब हालात ऐसे नहीं हैं। अब भाजपा के कोटे में कुमाऊं से मुख्यमंत्री भी है तो केंद्र में मंत्री भी। लोकसभा चुनाव में हरीश रावत को लाखों वोटों से हराने वाले अजय भट्ट को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

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