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उत्तराखंडः चार साल से शासन में अटकीं हैं बाढ़ सुरक्षा के कार्यों की योजनाएं
Thu, 16 May 2019 01:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
कासिम अंसारी, अमर उजाला, सितारगंज
कासिम अंसारी, अमर उजाला, सितारगंज
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 16 May 2019 01:02 PM IST
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प्रतीकात्मक
- फोटो : Reuters
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तराई में बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में गिने जाने वाले सितारगंज और खटीमा ब्लॉक में चार साल से लगातार बन रही बाढ़ सुरक्षा के कार्यों की योजनाएं शासन में लटकी हैं।
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सिंचाई विभाग के अनुसार सितारगंज में कैलाश नदी से बाढ़ सुरक्षा के लिए सिडकुल औद्योगिक पार्क, उकरौली, नकुलिया, खैराना, कौंधाअसरफ, कौंधारतन, औदली, सलमती, चीकाघाट, रसोइयापुर, डोहरी, पथरियाफार्म, सलमता, शक्तिफार्म में सूखी नदी से भक्तिनगर, जयंतनगर, ठाकुरनगर, गोविंदनगर, निर्मलनगर, बैगुल तटबंध, झाड़ी नौ नंबर, देवनगर, नानकमत्ता में देवहा नदी की बाढ़ से टुकड़ी, बिचुवा, कामन नदी से दीयां, गांगी, गिधौर आदि गांवों में बाढ़ सुरक्षा कार्य होने हैं। इसी तरह खटीमा की परवीन नदी, देवहा नदी, खकरा नाला समेत तमाम बाढ़ सुरक्षा कार्य होने हैं।
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इसके लिए विभाग ने गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड पटना और राज्य सरकार को करीब 17856.24 लाख के प्रस्ताव बनाकर भेजे थे। वर्ष 2016 से अब तक यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में हैं। विभाग हर साल इन गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए वैकल्पिक उपाय करता है। इससे करोड़ों रुपये बर्बाद होते हैं। वर्षाकाल शुरू होने में एक माह शेष है। बैगुल नदी में तो अभी भी भारी सिल्ट जमी है। ऐसे में क्षेत्र के लोग बाढ़ की संभावना से आशंकित हैं।
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65 लाख के रिवर ट्रेनिंग कार्यों का नहीं हुआ भुगतान
पिछले साल वर्ष 2018-19 में सिंचाई विभाग द्वारा क्षेत्र में रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत बैगुल व सूखी नदी पर बाढ़ राहत के कार्य कराए गए थे। करीब 65 लाख रुपये खर्च हुआ था। शासन से रिवर ट्रेनिंग की धनराशि का भुगतान न होने से इस बार ठेकेदारों ने भी बाढ़ सुरक्षा के काम करने से इनकार कर दिया है। ईई सुभाष चंद्र रमोला ने भुगतान के लिए डीएम डॉ. नीरज खैरवाल से मुलाकात की और सिंचाई सचिव भूपेंद्र कौर औलख को भी पत्र लिखा है।
वर्ष 2016 से अब तक शासन और गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड को करीब 17856.24 लाख के कामों के प्रस्ताव भेजे गए। स्वीकृति न मिलने से यह काम लंबित हैं। इस कारण इस बार वर्षाकाल से पहले बाढ़ सुरक्षा के पक्के इंतजाम होना संभव नहीं होगा।
- सुभाष चंद्र रमोला, ईई सिंचाई खंड सितारगंज