Pitru paksha 2020: एक सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, ये रहेंगी प्रमुख तिथियां...
- एक सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, तर्पण, ब्रह्मभोज व दान से मिलता है पुण्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऐसा कहा जाता है कि अगर पितृ खुश है तो ईश्वर की भी आप पर कृपा होती है। पितरों को खुश करने के लिए हमें श्रद्धाभाव के साथ उनका तर्पण, पूजा, ब्रह्मभोज एवं दान करना चाहिए। इसी श्रद्धा का प्रतीक होते हैं श्राद्ध।
इन्हें कनागत भी का जाता है। इस वर्ष पितृपक्ष एक सितंबर से शुरू हो रहा है। इस पखवाड़े में अपने पूर्वजों का श्राद्ध तर्पण किया जाता है। इसमें अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनका आभार जताते हैं कि उनकी वजह से ही आज हम इस दुनिया में हैं।
उत्तराखंड विद्वत सभा के प्रवक्ता आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने बताया कि श्राद्ध भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अश्विन मास की अमावस्या तक होते हैं। माना जाता है कि इस समयावधि के दौरान पितृ स्वर्गलोक, यमलोक, पितृलोक, देवलोक, चंद्रलोक व अन्य लोकों से सूक्ष्म वायु शरीर धारण कर धरती पर आते हैं।
वे देखते हैं कि उनका श्राद्ध श्रद्धाभाव से किया जा रहा है या नहीं। अच्छे कर्म दिखने पर पितृ अपने वंशजों पर कृपा करते हैं। श्राद्ध में पितरों के नाम से तर्पण, पूजा, ब्रह्मभोज व दान करना पुण्यकारी होता है। आचार्य सुशांत राज ने कहा कि अगर कोई अपने पितरों का श्राद्ध नहीं करता या श्रद्धापूर्वक नहीं करता तो पितृ नाराज हो जाते हैं। इससे पितृ दोष लगता है।
पितृपक्ष पखवाड़ा
1 सितंबर : पूर्णिमा, 9.45 के बाद
2 सितंबर : प्रतिपदा श्राद्ध, सुबह 11 बजे के बाद
3 सितंबर : प्रतिपदा श्राद्ध, पूरा दिन
4 सितंबर : दूसरा श्राद्ध, पूरा दिन
5 सितंबर : तीसरा श्राद्ध, पूरा दिन
6 सितंबर : चौथा श्राद्ध, पूरा दिन
7 सितंबर : पांचवां श्राद्ध, पूरा दिन
8 सितंबर : छठा श्राद्ध, पूरा दिन
9 सितंबर : सातवां श्राद्ध, पूरा दिन
10 सितंबर : आठवां श्राद्ध, पूरा दिन
11 सितंबर : नौवां श्राद्ध, पूरा दिन
12 सितंबर : दसवां श्राद्ध, पूरा दिन
13 सितंबर : ग्यारहवां श्राद्ध, पूरा दिन
14 सितंबर : बारहवां श्राद्ध, पूरा दिन
15 सितंबर : तेरहवां श्राद्ध, पूरा दिन
16 सितंबर : चौदहवां श्राद्ध, पूरा दिन
17 सितंबर : अमावस्या, पूरा दिन