पिथौरागढ़ आपदा: आसमानी आफत की दहशत अब भी बरकरार, ऐसे गुजर रही आपदा पीड़ितों की रात
टांगा गांव में आपदा को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों के मन में आसमानी आफत की दहशत अब भी बरकरार है। इन ग्रामीणों का दिन गांव में तो रातें गांव से चार सौ मीटर दूर नदी से कुछ ऊपर लगाए गए एक प्लास्टिक के टेंट में गुजर रही हैं। जहां पर टैंट लगाया गया है वह भी अब खतरे में आ गया है।
19 जुलाई की रात मूसलाधार बारिश से हुए भूस्खलन में तीन मकानों के जमींदोज होने की घटना से सभी ग्रामीण सहमे हैं। घटना को पांच दिन बीत चुके हैं। इतने दिनों में भी सभी के चेहरों पर खौफ बरकरार है। घटना के बाद से किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला है।
सभी ग्रामीण सामूहिक रूप से एक आंगन में भोजन कर रहे हैं। घर में रहने का मन करता है, लेकिन बार-बार गांव के ऊपर फटी धरती पर नजर जाते ही भय लगने लगता है।
रात लगभग जागकर ही गुजारनी पड़ती है
सभी ग्रामीण पिछले पांच दिन से अपनी रातें लगभग 300 मीटर की दूरी पर लगाए गए प्लास्टिक के टैंट में बिता रहे हैं। भगत सिंह और गोविंद सिंह ने बताया कि अब भी लगातार बारिश हो रही है। गांव में नदी की ओर से भी कटाव हो रहा है।
पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। कब फिर से हादसा हो जाय यह सोचकर शाम का खाना खाने के बाद सभी लोग टैंट में चले जाते हैं। वहां पर पुआल बिछाया गया है। उसी में सोते हैं, लेकिन जिस स्थान पर टैंट लगाया गया है वहां पर भी अब नदी की ओर से भूस्खलन होने लगा है।
अधिक बारिश होने पर खतरा है। इसलिए रात लगभग जागकर ही गुजारनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभारी मंत्री की ओर से मिले आश्वासन के बाद अब उन्हें कुछ उम्मीद जगी है।