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इस तरह चीड़ की पत्ती (पिरूल) बनेगी आय का जरिया, जंगल बचेंगे और पलायन भी रुकेगा 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Tue, 17 Apr 2018 02:01 PM IST
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निष्प्रयोज्य समझी जाने वाली चीड़ की पत्ती (पिरूल) अब लोगों की आय का जरिया बनेगी। इससे फाइल, लिफाफे, कैरी बैग, फोल्डर, डिस्प्ले बोर्ड आदि सामग्री बनाई जाएगी।
इसके लिए गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के ग्रामीण तकनीकी परिसर में प्रदेश की पहली चीड़ पत्ती प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है। पिरूल से उत्पादित वस्तुएं जहां आय का साधन बनेंगी, वहीं जंगलों को आग से बचाने के साथ पलायन भी रुकेगा। 

चीड़ की सूखी पत्ती पिरूल ज्वलनशील होती है। यह जंगलों में आग लगने का प्रमुख कारण है, जिससे वन संपदा के साथ ही जीव-जंतुओं को हर साल काफी नुकसान होता है। वन विभाग ने एक दशक पहले पिरूल से कोयला बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह सफल नहीं हो सकी। लेकिन, अब पर्यावरण संस्थान के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के अंतर्गत चल रहे मध्य हिमालयी क्षेत्रों में एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन ने सतत आजीविका सुधार कार्यक्रम के तहत चीड़ पत्ती प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है। इकाई के तहत 65 लाख रुपये की लागत के कटर, ब्वॉयलर आदि उपकरण लगाए गए हैं। 
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पिरूल से ऐसे बनेंगे फोल्डर 

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