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केदारनाथ धाम को आपदा से बचाएगी यह 'दीवार'

Fri, 10 Apr 2015 09:46 AM IST
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला देहरादून
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला देहरादून Updated Fri, 10 Apr 2015 09:46 AM IST
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pilgrims will see the totally change view of kedarnath.

इस बार 24 अप्रैल को तीर्थयात्री जब बाबा केदारनाथ धाम पहुंचेंगे तो उन्हें बहुत कुछ नया देखने को मिलेगा। जून 2013 की आपदा ने केदारनाथ में कई अनचाहे बदलाव किए। इसके बाद वहां हुए निर्माण कार्यों की बदौलत इस बार कई बदलाव सुखद अहसास दिलाएंगे।

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पिछले साल तक दिखे आपदा के ज्यादातर निशान नवनिर्माण से मिटाए जा चुके हैं। जो बचे हैं, उन्हें भी यात्रा के आरंभ होने तक हटाया जा चुका होगा। इस बार खुले-खुले मंदिर परिसर के साथ ही पुल पर पहुंचते ही देवदर्शन का संतोष मिलेगा।
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रुद्रा टॉप की खड़ी चढ़ाई से निजात मिलेगी तो धाम में पुनर्निर्माण के लिए लाई गई भारी-भरकम मशीनें भी देखने को मिलेंगी।

2013 की आपदा ने केदारनाथ धाम से पूर्व के मुख्य पड़ाव रामबाड़ा का पूरा भूगोल बदल दिया था। इस बार केदारनाथ की ओर बढ़ते हुए रामबाड़ा से यात्रियों को नवीनता के दर्शन होंगे।

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दूर से ही होंगे केदारबाबा के भव्य दर्शन

pilgrims will see the totally change view of kedarnath.

इस बार पैदल रास्ता लंबा होगा, लेकिन श्रद्धालुओं का दम फुलाने वाली रुद्रा टॉप की करीब एक-डेढ़ किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई से निजात भी मिलेगी। रास्ता अब कम चढ़ाई वाला होगा, जो रुद्रा टॉप के बाद समतल हो जाएगा।

एक और परिवर्तन देखने को मिलेगा। पहले केदारनाथ मंदिर को यात्री ढूंढते थे, क्योंकि मंदिर परिसर आसपास की ऊंची इमारतों के बीच ढका हुआ था। मंदिर के एकदम करीब पहुंचने पर ही इसकी भव्यता दिखती थी।

अब पांच सौ मीटर पहले पड़ने वाले पुल से ही मंदिर दिखने लगेगा। केदारनाथ में काम कर रहे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की टीम को 50 फीट चौड़ा रास्ता बनाने में भी सफलता मिल गई है। अब इस पुल से ही केदारनाथ की पूरी भव्यता यात्रियों के सामने होगी। यात्री आराम से चहलकदमी करते हुए मंदिर तक पहुंचेंगे।

मंदिर के तीन तरफ बन रही सुरक्षा दीवार

pilgrims will see the totally change view of kedarnath.

मंदिर के पास अब सीढ़ियां हैं। इनके बगल में रैंप बनाने की भी तैयारी है। पहले रुद्रा टॉप से आते हुए पुल तक पहुंचने में यात्रियों को फिसलन भरे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना होता था। लेकिन अब यात्री सीधे चलकर इस पुल पर पहुंच सकते हैं।

केदारनाथ धाम में नदी की धाराएं भी बदली हैं। मंदाकिनी और सरस्वती की दो धाराएं जून 2013 की आपदा के बाद एक हो गई थीं। अब मंदाकिनी और सरस्वती आपदा से पहले के रूट पर ही नजर आएंगी। केदारनाथ में मंदिर के तीन तरफ सुरक्षा दीवार भी बन रही है।

दोनों नदियों पर घाट का निर्माण भी हो रहा है। भैरव मंदिर जाने के लिए पहले सरस्वती को पार करने में कूदना-फांदना पड़ता था। इस बार केदार मंदिर से भैरव मंदिर जाने के लिए पक्का पुल बना मिलेगा। केदारनाथ में खूबसूरत कॉटेज भी बनाए गए हैं। इसमें सुविधाएं मध्य वर्ग के घर जैसी हैं।

धाम में गूंजेंगी पोकलैंड, जेसीबी मशीनों की आवाज

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यही नहीं इस बार केदारनाथ में पोक लैंड, जेसीबी, ऑल टेरेन व्हीकल, दो-दो क्रशर, एक पूरी वर्कशॉप, मनोरंजन घर भी नजर आएगा। इन मशीनों को यहां पहुंचाने के लिए 150 गुणा 50 वर्ग मीटर का हेलीपैड भी तैयार किया गया है।

यहीं पर करीब सात सौ लोगों के रहने लायक टेंट की कॉलोनी होगी। यात्रियों को इस बार यहां पुनर्निर्माण का काम भी होता दिखेगा। शिव की स्तुति के बीच पोकलैंड और जेसीबी से काम होते देखना, वह भी इतनी ऊंचाई पर, एक अलग अनुभव हो सकता है।

सजी धजी नजर आएगी दिव्य शिला
और हां, जलप्रलय के दौरान मंदिर के ठीक पीछे अड़कर नुकसान से बचाने वाली चट्टान, जिसे अब दिव्य शिला कहा जाता है वह भी सजी-धजी नजर आएगी। फिलहाल यह बर्फ से ढकी हुई है। इसकी साज-सज्जा फूलों से की जाती है। श्रद्धालु अब इसे भी पूजने लगे हैं।

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