लखपति निकले सरकारी कागजों में खुद को ‘फकीर’ बताने वाले, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी छात्रवृत्ति लेने के लिए लोगों ने ऐसा फ्रॉड किया कि देखकर अधिकारियों का भी सिर चकरा गया। छात्रवृत्ति लेने वाले वाले मयंक नौटियाल के पिता मुन्नालाल ने मामूली आय का प्रमाणपत्र बनवाकर खुद को भले ही सरकारी दस्तावेज में ‘फकीर’ साबित कर रखा था, लेकिन हकीकत में वो लाखों की संपत्ति का मालिक है।
कोठी, प्लाट के साथ कई कारों का पंजीकरण उनके अथवा परिजनों के नाम दर्ज है। छात्रवृत्ति घोटाले का सच बाहर लाने की लड़ाई लड़ रहे किरदारों ने बाकायदा नौटियाल की संपत्ति का पूरा चिट्ठा एसआईटी को उपलब्ध कराया था। एसआईटी को भी आयकर विभाग की मदद से आय प्रमाणपत्र और माली हालत का अंतर साफ करने में देर नहीं लगी।
प्रदेश के प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग की छात्रवृत्ति में घोटाले की लंबे समय से सुलग रही चिंगारी अब शोला बनती दिख रही है। नैनीताल हाईकोर्ट की नाराजगी ने एसआईटी जांच को गति दे दी है। नतीजा यह हुआ कि लंबे समय से फाइलों में छिपी शिकायताें का परिणाम अब सामने आने लगा है।
एसआईटी जांच में मुन्ना लाल नौटियाल की आयकर विभाग से जुटाई गई रिटर्न की जानकारी से आय कम दर्शाकर छात्रवृत्ति हड़पने के पूरे खेल से पर्दा उठ गया। राजस्व विभाग की ओर से जारी आय प्रमाणपत्र में मामूली मासिक आय के साथ भले ही मुन्ना लाल नौटियाल ‘फकीर’ हाें, लेकिन आयकर के दस्तावेजों के अनुसार 2011 से वह आयकर रिफंड लेते रहे है।
जाहिर है कि उनकी आय खासी ज्यादा रही होगी। जांच में फर्जी दस्तावेजों से लाखाें की छात्रवृत्ति वसूलने में लेखपाल से लेकर समाज कल्याण विभाग के नोडल अधिकारी का घालमेल उजागर हुआ है। अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती ने एसआईटी को मुन्ना लाल नौटियाल की पूरी संपत्ति का ब्योरा उपलब्ध कराया था।
शिकायतकर्ता चंद्रशेखर ने बताया कि विकास नगर में आलीशान मकान के अलावा डांडा नूरीवाला स्थित प्लाट भी उनके नाम है। यही नहीं 2002, 2013 और 2016 में बाप-बेटों के नाम अलग-अलग पते पर कई कारें खरीदी गईं हैं। जाहिर है कि लाखों की संपत्ति के वारिस होते हुए आरोपियाें ने छात्रवृत्ति वसूलने को यह ताना-बाना बुना था।
पहले हैसियत और फिर बनाया आय प्रमाण पत्र
एसआईटी जांच में आया है कि मुन्नालाल नौटियाल ठेकेदारी करते हैं। क्षेत्रीय लेखपाल ने तहसीलदार के माध्यम से मुन्नालाल नौटियाल का पहले हैसियत प्रमाणपत्र जारी कराया था। बड़ी बात यह है कि हैसियत प्रमाण पत्र जारी करने वाले लेखपाल और तहसीलदार ने ही उनकी कम आय का प्रमाण पत्र जारी किया है।
इससे साफ होता है कि मुन्नालाल नौटियाल ने लेखपाल और तहसीलदार से सांठगांठ कर यह पूरा खेल किया है। जबकि दोनों नौटियाल की आर्थिक हालत से पूरी तरह वाकिफ थे।