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यूट्यूब पर पांडवाज की 'फुलारी' ने मचाई धूम
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 05 Mar 2017 05:29 PM IST
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- फोटो : demo pic
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यूट्यूब पर पांडवाज की फुलारी ने धूम मचा दी है। गीत को पांच दिनों में ही 54 हजार से ज्यादा व्यू मिले हैं। इसके अलावा व्हाट्स एप, फेसबुक समेत अन्य सोशल साइटों पर भी गीत को खूब शेयर और लाइक किया जा रहा है। पांडवाज की टाइम मशीन सीरीज का पहला गीत ‘घुघुती-बासुती’ भी खूब पसंद किया गया था। इस गीत को अब तक 70 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
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श्रीनगर गढ़वाल के तीन डोभाल भाइयों का प्रोडक्शन हाउस टाइम मशीन सीरीज के तहत पहाड़ के उन पारंपरिक लोक गीतों को नए अंदाज में लोगों के बीच ला रहा है, जो कभी बेहद प्रसिद्ध रहे हैं। बसंत के मौके पर पहाड़ में मनाए जाने वाले फूलदेई के त्योहार के दौरान बच्चों के घर-घर जाकर दहलीज पर ताजे फूल डालने की परंपरा है।
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चला फुलारी फूलु कु, सौदा-सौदा फूल बिरौंला गुनगुनाते हुए बच्चे फूल इकट्ठा करते हैं और उन्हें गांव के हर घर के बाहर डालते हैं। इसके बदले में लोग बच्चों को गुड़, चावल और अन्य चीजें देते हैं।
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पलायन और वक्त बदलने के साथ अब फूलदेई का त्योहार कम ही मनाया जाता है। इसको लेकर पांडवाज ने प्रख्यात लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के सुप्रसिद्ध गीत हे जी सारियूं मां फूली गे होली फ्योंली लयेडी गीत को जोड़ते हुए वीडियो तैयार किया है। सुप्रसिद्ध रंगकर्मी डा. डीआर पुरोहित और प्रेम मोहन डोभाल ने उसमें नई लाइनें जोड़ते हुए पहाड़ के लोक रंग से सरोबार कर दिया।
वीडियों में संगीत इशान डोभाल ने दिया है जबकि डायरेक्शन सलिल डोभाल का है। कुणाल डोभाल ने वीडियो तैयार किया है। गीत को कविंद्र नेगी, अंजली खरे, अनामिका वशिष्ठ और सुनिधि वशिष्ठ ने अपनी आवाज दी है। कविंद्र सिंह, अनूप डोबरियाल और द क्रिएटिव एकेडमी रुद्रप्रयाग के बच्चों ने एक्टिंग की है। इसकी शूटिंग दिल्ली, ऋषिकेश, देहरादून, बारसू, चोपता और अरकणी गांव समेत आस-पास के इलाकों में हुई है।