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अमेरिका तक पहुंचा पैंक्रियाटाइटिस के आयुर्वेदिक उपचार का अनोखा तरीका, विशेषज्ञों ने भी की सराहना

Thu, 01 Nov 2018 08:31 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 01 Nov 2018 08:31 AM IST
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Pancreatitis Ayurvedic treatment presentation in fourth world congress America
Ayurveda - फोटो : demo pic

पैंक्रियाटाइटिस रोग के आयुर्वेदिक उपचार का तरीका अमेरिका में भी गूंज उठा। मौका था सैन फ्रांसिस्को में पाचन एवं चयापचय रोगों पर आयोजित चौथी विश्व कांग्रेस का। इसमें उत्तराखंड के पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश ने अपना आयुर्वेदिक फार्मूला सबके सामने रखा तो सबने सराहना की।

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चौथी विश्व कांग्रेस में वैद्य बालेंदु प्रकाश ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। इसमें उन्होंने धातुओं पर आधारित आयुर्वेदिक चिकित्सा हासिल करने वाले 620 रोगियों के आंकड़े पेश किए। बताया कि पैंक्रियाटाइटिस जानलेवा बीमारी है।
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19 से 30 वर्ष की आयु में यह रोग सबसे अधिक होता है। उत्तराखंड में इससे पीड़ित 36 रोगी उन्हें अब तक मिल चुके हैं। इनमें से ज्यादातर रोगियों ने कभी शराब, मांस और तंबाकू का सेवन नहीं किया था। 

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चूहों पर भी यह दवा असर दिखा चुकी

उन्होंने बताया कि केवल 15 प्रतिशत रोगी ऐसे थे, जिनमें यह रोग आनुवांशिक के चलते पनपा था। दुनियाभर से आए विशेषज्ञ भी उनके इस आयुर्वेदिक उपचार फार्मूले को लेकर उत्साहित नजर आए।

उन्होंने बताया कि वह इस रोग के उपचार के लिए पारद, तांबा, गंधक को देवदाली, अपराजिता एवं नींबू स्वरस से तीन वर्ष में बनने वाली इस औषधि को अपनी रसशाला में तैयार करते हैं।

औषधि का कोई दुष्प्रभाव नहीं है। चूहों पर भी यह दवा असर दिखा चुकी है। वैद्य बालेंदु चाहते हैं कि उनके इस आविष्कार को नोबेल पुरस्कार मिले। भारत सरकार उनके इस फार्मूले को पेटेंट करवा चुकी है।

24 देसी-विदेशी मरीज करवा रहे इलाज

पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश ने हाल ही में गदरपुर के रतनपुरा क्षेत्र में आयुर्वेदिक विशिष्ट चिकित्सा केंद्र की स्थापना की है। वैद्य बालेंदु प्रकाश को अमेरिका के कई शहरों में वैज्ञानिकों के सामने शोधपत्र पढ़ने के लिए आमंत्रित किया है। वर्तमान में उनके केंद्र में जापान, अमेरिका समेत देश के करीब 11 राज्यों से पैंक्रियाटाइटिस रोग से पीड़ित 24 लोग स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। वैद्य बालेंदु ने अमेरिका से फोन पर बताया कि पिछले 40 दिन में वह दो बार अमेरिका पहुंचकर वहां के संस्थानों में इस पर व्याख्यान दे चुके हैं। 

क्या है क्रोनिक पैनक्रियाटाइटिस
यह पेट के पैनक्रियाज से जुड़ी है। यह खाने को पचाने में मदद करता है, लेकिन जब इस अंग पर सूजन आ जाती है तो वह निष्क्रिय होने लगता है। इससे पेट में तेज दर्द, कमर में दर्द, उल्टी आना, दस्त लगना, अपच, बार-बार पेन अटैक और तेजी से वजन घटने की समस्या सामने आती है।

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