आखिर पता चल गई एक वोट की कीमत
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की मतगणना के बाद जीते हुए प्रत्याशियों में खुशी है तो हारे हुए मायूस हैं। सबसे अधिक मायूसी उन्हें है जिन्हें महज एक या दो वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा।
इन्हें अगले पांच साल तक यह दर्द सालता रहेगा कि एक वोट का जुगाड़ कर लिया होता तो स्थिति कुछ और हो सकती थी।
पुरोला प्रखंड के महर गांव की क्षेत्र पंचायत सदस्य सीट पर कमलेश दो वोटों के अंतर से हार गए जबकि करड़ा में जगदीश, नौगांव प्रखंड की किम्मी सीट पर कामिनी देवी, चिन्यालीसौड़ के टिपरी दशगी गांव में निहाल सिंह, डुंडा प्रखंड में खुरमोला सीट पर सतेंद्र सिंह को महज 1-1 वोट के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा जिले में दस अन्य बीडीसी सीटों पर भी हार जीत का अंतर नौ से कम रहा।
एक वोट से नहीं बन पाए प्रधान
ग्राम प्रधान पदों पर भी कम अंतर से हार जीत के कई मामले सामने आए। पुरोला प्रखंड के किमडार गांव में राजकुमारी, नौरी में जयमाला, चिन्यालीसौड़ प्रखंड के कवागडी गांव में जमुना देवी, डुंडा प्रखंड के कमद गांव में हंसराम, जुणगा में उर्मिला, भटवाड़ी के सुक्की गांव में दिनेश सिंह तथा भंकोली में रतन सिंह सिर्फ एक-एक वोट के अंतर से चुनाव हार गए।
पुरोला के नेत्री गांव में मोहन सिंह, नौगांव के थानकी गांव में उपेंद्र सिंह, ब्याली गांव में जसवंत सिंह, कुठार में नागेंद्र सिंह, बिगराड़ी में सकलचंद, डुंडा प्रखंड के जेमर गांव में विनोद, भटवाड़ी के सिल्ला में मोहन सिंह, भटवाड़ी गांव में विवेक, बसूंगा में दीपक राणा तथा भैलुड़ा में संतोषी को महज 2-2 वोट के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
बराबर वोट पर टॉस ने छीन ली खुशी
भटवाड़ी प्रखंड के अगोड़ा गांव में क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर बिंद्रा देवी एवं स्यानादेवी को बराबर वोट हासिल हुए।
चिन्यालीसौड़ प्रखंड के बनोट पल्ला गांव में प्रधान पद पर कैलाशी देवी एवं ममता को समान वोट प्राप्त हुए। इन जगहों पर टॉस के माध्यम से फैसला हुआ और बिंद्रा देवी और कैलाशी देवी की किस्मत खुली।