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देवभूमि में विराज रहे ओडिशा के देवता

Sun, 23 Nov 2014 03:21 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sun, 23 Nov 2014 03:21 PM IST
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other states people migrate in uttarakhand.

हजारों किलोमीटर से दूर से हल्द्वानी आकर प्रवासियों का बसना अपने आप में उन लोगों के लिए सबक और संदेश है, जो पहाड़ से पलायन कर रहे हैं।

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बस गए कई परिवार

महानदी और काठजूडी के मिलन स्थल पर बसे कटक शहर (ओडिशा) से देवता परिवार यहां आकर बस चुका है। उनकी झोली इसी देवभूमि में खुशियों से भरी है। ओडिशा के कटक (यहां से करीब 1500 किमी दूर) की अतसी देवता नीलांचल कॉलोनी में पिछले चार साल से किराए पर रह रही हैं।
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इंजीनियर पति आशुतोष देवता सिडकुल में पीएनपी ऑटो कंपनी में मैनेजर पद पर कार्यरत हैं। 2008 में शादी के बाद पहले दिल्ली में रहीं, उसके बाद 2009 में रुद्रपुर में रहने आईं तो वहां की गर्मी सहन नहीं कर पाईं। अपनों की सलाह पर हल्द्वानी का जायजा लेने आईं तो एक बार में ही शहर पसंद आ गया।
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क्यों भायी हल्द्वानी, इस सवाल पर अतसी का जवाब था कि पहली नजर में यहां का मौसम बहुत अच्छा लगा और माहौल शांत दिखा। जब अपना आशियाना बसाने की बात हुई तो वह कहती हैं कि मेरे सास-ससुर हाल ही में यहां आए थे, यहीं बसने की हमारी राय पर मुहर लगा गए हैं।

कुमाऊंनी भी समझती है

चेहरे पर प्रसन्ना का भाव लिए कहती हैं कि जल्द ही यहां अपना प्लाट हो जाएगा। यहां का राशन कार्ड तो बन ही चुका है। अब किसी चीज की कमी नहीं है। अतसी कुमाऊंनी बोल तो नहीं पाती हैं, लेकिन अब समझने लगी हैं। शिक्षा पर कहती हैं कि यहां एजुकेशन तो है, लेकिन हायर एजुकेटेड लोग गिने-चुने हैं। ग्रेजुएशन तक जाते-जाते ज्यादातर युवा सेटल होना चाहते हैं।

बीए कर चुकी अतसी अभी गृहणी हैं और चार साल की बिटिया के लालन-पालन में व्यस्त हैं। बताती हैं कि दिल्ली में बच्चों के लिए माहौल सही नहीं है, इसलिए दिल्ली में बसना नहीं चाहती। ओडिशा में बारिश के बाद कीचड़ से जीना दूभर हो जाता है, लेकिन यहां भारी बारिश के बाद भी पानी कहां चला जाता है, पता ही नहीं चलता।


शहर अपराध मुक्त है। सब्जियां ताजी मिल जाती हैं। यातायात पर कहती हैं कि कटक जाने के लिए दिल्ली जाना पड़ता है। लंबी दूरी की ट्रेन होने के बावजूद बाघ एक्सप्रेस में पेंट्री कार नहीं होने से असुविधा होती हैं।

यदि यहां से हावड़ा के लिए सुपर फास्ट ट्रेन की सुविधा मिलती या जगन्नाथ पुरी धाम के लिए विशेष ट्रेन होती तो दोनों राज्यों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता, साथ ही हम जैसे लोगों के लिए जन्म धरती पर जाने-आने में सुविधा होती।

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