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ऑर्डिनेंस फैक्टरी ने भीष्म टैंक (टी-90) और असाल्ट राइफल के लिए बनाए स्वदेशी साइट उपकरण

Tue, 03 Nov 2020 04:24 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 03 Nov 2020 04:24 PM IST
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Ordnance factory built indigenous site equipment for Bhishma tank (T-90) and assault rifle
टैंक टी-90 (भीष्म) - फोटो : ANI

दुश्मन पर सटीक निशाना साधने के लिए देहरादून ऑर्डिनेंस फैक्टरी ने दो और साइट उपकरण (दृष्टि यंत्र) तैयार किए हैं। पूर्णतया स्वदेशी तकनीक से तैयार इन उपकरणों की लागत आयातित से बेहद कम और सटीकता भी कई गुना अधिक होगी। इनमें पहला भीष्म टैंक (टी-90) का मजल बोर साइट और दूसरा 7.62 एमएम की असाल्ट राइफल के लिए टेलीस्कोप शामिल है। इन दोनों उपकरणों के लिए फैक्टरी को जल्द ही ऑर्डर मिलने की भी उम्मीद है। 

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ऑर्डिनेंस फैक्टरी के अपर महाप्रबंधक पीके दीक्षित ने बताया कि फैक्टरी समय समय पर भारतीय सेना के लिए बेहतर साइट उपकरण बनाती है। इनमें कुछ डे लाइट (दिन) हैं और कुछ रात्रि के लिए। वर्तमान में फैक्टरी कुल 13 उपकरण तैयार कर रही है। इनमें से पहले दो ये महत्वपूर्ण उपकरण हैं।
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इनमें से मजल बोरसाइट उपकरण के लिए फैक्टरी भारतीय सेना की टेक्निकल बिड जीत चुकी है। अब केवल फाइनेंशियल बिड का इंतजार है। जबकि, असाल्ट राइफल के टेलीस्कोप की मांग हजारों और लाखों में रहती है। यह अपनी तरह का भारत में निर्मित अब तक का सबसे उत्तम उपकरण है। इससे भारतीय सेना की मारक क्षमता पहले से कई गुना हो जाएगी। जल्द ही फैक्टरी कुछ और महत्वपूर्ण उपकरणों को बनाकर लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। 

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भीष्म टैंक को सटीकता देगा यंत्र 

मजल बोर साइट यूपीवी 125 पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। एल्यूमिनियम अलॉय से बना यह उपकरण लगभग साढ़े चार किलोग्राम का है। इसका मूल काम टैंक की गन को अलाइमेंट (सीधाई) देकर दृष्टि प्रदान करने का होता है।

इसकी क्षमता की अगर बात करें तो यह विदेशी मजल साइट से भी ज्यादा सटीक होगी। इससे टार्गेट को 13 गुना तक मैग्नीफाइ (बड़ा) कर देखा जा सकता है। इसकी लागत आयातित मजल साइट से आधी आई है। इसकी 300 यूनिट अगले साल मार्च तक सेना को मुहैया करानी है।

डे साइट टेलीस्कोप 4 एक्स 

असाल्ट राइफल पर लगाए जाने वाला डे साइट टेलीस्कोप भी पूरी तरह भारत में ही विकसित किया गया है। इसे असाल्ट राइफल पर लगाने के बाद सैनिक अपने टार्गेट को चार गुना बड़ा कर देख सकते हैं। इससे उनकी सटीकता अधिक बढ़ जाएगी। मसलन, यदि किसी सैनिक को सामने खड़े दुश्मन के माथे पर निशाना लगाना है तो वह उसे चार गुना अधिक बड़ा कर देखकर सटीक निशाना लगा सकता है। झा ने बताया कि इसके लिए सेना की टेक्निकल बिड में फैक्टरी मौका पा गई है।

24 एक्स भी कुछ दिनों में होगा तैयार 

अब तक 7.62 असाल्ट राइफल पर बिना किसी जूम वाले साइट उपकरण लगाए जाते हैं। 4 एक्स टेलीस्कॉप अब तक का भारत में मौजूद सबसे उन्नत उपकरण है। जल्द ही फैक्टरी में 24 एक्स टेलीस्कोप भी तैयार कर लिया जाएगा। इसे राइफल पर लगाने के बाद टार्गेट को 24 गुना तक बड़ा कर देखा जा सकता है।

अब तक इजराइल और रूस था सोर्स 

पीके दीक्षित के मुताबिक अब तक ये दोनों उपकरण ही बाहर से आयात किए जाते थे। इनमें मजल साइट का इकलौता सोर्स रूस था। टेलीस्कोप रूस और इजराइल दोनों देशों से मंगाए जाते थे। कुछ भारतीय कंपनियां भी विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर इसे बना रही हैं। उनकी कीमत ऑर्डिनेंस में बने इस टेलीस्कॉप से बेहद अधिक है।

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