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डेढ़ सौ करोड़ के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के आदेश

Sun, 21 May 2017 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला,देहरादून Updated Sun, 21 May 2017 11:03 PM IST
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Order of investigation of scholarship scam by cm trivendra singh rawat
trivendra singh rawat

डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा के बहुचर्चित दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले की अब विस्तार से जांच होगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसके आदेश दे दिए हैं। गहराई से पड़ताल होने पर समाज कल्याण विभाग के तमाम अफसरों के अलावा निजी कॉलेज संचालकों की हेरफेर पुख्ता होने की उम्मीद है।

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सरकार के प्रवक्ता और कबीना मंत्री मदन सिंह कौशिक ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। इसमें जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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गौरतलब है कि 27 मार्च 2017 को अपर सचिव वी. षणमुगम ने समाज कल्याण विभाग को छात्रवृत्ति घोटाले की जांच आख्या सौंपी थी। इसमें विकासनगर के 11 और सेवलाकलां के आठ छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति से जुड़े मामलों में प्रारंभिक जांच का पूरा ब्योरा है।
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देहरादून की ही तरह हरिद्वार जिले से जुड़े कुछ मामलों में साफ तौर पर यह बात सामने आई है कि कुछ बिचौलियों ने इन छात्रों के कागजात लेकर उनके दाखिले करा दिए। बैंक के खाते भी इनकी जानकारी के बगैर खुलवाए गए और विड्रॉल फॉर्म में दाखिले के वक्त ही छात्रों के हस्ताक्षर करवा लिए गए। बैंक की पासबुक भी इन्हें नहीं दी गई। लगभग सभी की हाजिरी भी नाम मात्र की रही।

शासन स्वीकार कर चुका है घपले की बात

Order of investigation of scholarship scam by cm trivendra singh rawat
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कुछ को पेपर भी दिलवाए गए, जिसके एवज में दो-चार हजार रुपये दे दिए गए। जांच अधिकारी ने कहा है कि न्यूनतम 70 फीसदी उपस्थिति होने के बाद ही विद्यार्थी छात्रवृत्ति का अधिकारी होता है। मगर, इनमें से एक भी इस पैमाने पर खरा नहीं उतरता है।

इसके अतिरिक्त यह भी प्रावधान है कि छात्रवृत्ति मांग पत्र का भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए, जो नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त संस्थान की मान्यता की जांच भी समाज कल्याण अधिकारियों ने नहीं की। जांच अधिकारी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि देहरादून और हरिद्वार के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारियों ने गैर कानूनी कार्य किया है, जिससे सरकारी पैसे की बर्बादी हुई है।

यही नहीं यह एससी-एसटी एक्ट के अनुसार भी दंडनीय कार्य है। उन्होंने सभी मामलों की विस्तार से जांच करवाने की सिफारिश भी की थी। इसी पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विस्तृत जांच के आदेश किए हैं।

छात्रवृत्ति में भारी पैमाने पर गड़बड़ी की बात शासन भी मान चुका है। बीते दिनों छात्रवृत्ति देने के पूर्व तमाम औपचारिकताएं करने संबंधी एक शासनादेश तत्कालीन सचिव अमित सिंह नेगी ने जारी किया था। इसमें भी इस बात का जिक्र किया गया है कि बिचौलियों की मदद से छात्रवृत्ति की रकम में घपला किया गया है।

इतना होने के बावजूद भी विस्तृत जांच कराने की फाइल लंबे समय से लंबित रखी गई। सूत्रों की मानें तो एक आला भाजपा नेता भी इस जांच को रुकवाने में जोर लगाए रहे।

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