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Dehradun News: बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन का विरोध, नक्शा पास कराने का अधिकार बढ़ाने की पैरवी

Thu, 06 Apr 2023 02:52 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Thu, 06 Apr 2023 02:52 PM IST
सार

इंजीनियरों, ड्राफ्ट्समैनों और डिप्लोमा होल्डर्स ने कहा कि प्रस्ताव एक वर्ग विशेष के हित को ध्यान में रखकर बनाया गया है। नए संशोधन अव्यवहारिक हैं, इससे इंजीनियर्स, ड्राफ्टमैन और डिप्लोमा होल्डर्स बेरोजगार हो जाएंगे।

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Protest to amendment in building bylaws lobbying to increase right to pass the map Dehradun Uttarakhand news
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

इंजीनियर, ड्राफ्ट्समैन और डिप्लोमा होल्डर्स ने उत्तराखंड में बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन का विरोध किया है। उन्होंने एमडीडीए के कार्यालय पर प्रदर्शन कर कहा कि उनकी सलाह लिए बगैर भवन निर्माण एवं विकास उपविधि उत्तराखंड (संशोधन 2023) का प्रस्ताव जारी कर दिया गया है। संशोधन प्रस्ताव में उनकी राय भी शामिल की जाए।

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एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल इंजीनियर्स एंड टेक्निकल्स के बैनर तले इंजीनियरों, ड्राफ्ट्समैनों और डिप्लोमा होल्डर्स ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव एक वर्ग विशेष के हित को ध्यान में रखकर बनाया गया है। नए संशोधन अव्यवहारिक हैं, इससे इंजीनियर्स, ड्राफ्टमैन और डिप्लोमा होल्डर्स बेरोजगार हो जाएंगे।
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कहा कि जब से विकास प्राधिकरणों का गठन हुआ है, तभी से इंजीनियर, ड्राफ्ट्समैन तथा डिप्लोमा होल्डर्स को सभी प्रकार के मानचित्र बनाने और स्वीकृत कराने की स्वतंत्रता थी, लेकिन 2016 में अध्यादेश के जरिये इंजीनियरों को दो हेक्टेयर और डिप्लोमा होल्डर्स एवं ड्राफ्ट्समैन को 250 वर्ग मीटर के दायरे में बांध दिया गया। नए संशोधन में इस दायरे को भी खत्म करने की साजिश की जा रही है।

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यह बदलाव करने की उठाई मांग

- ड्राफ्ट्समैनों तथा डिप्लोमा होल्डर्स को भवन मानचित्र स्वीकृत कराने की सीमा 100 वर्ग मीटर की बजाय पहले की तरह 250 वर्ग मीटर की जाए। व्यवसायिक मानचित्र बनाने की भी स्वीकृति प्रदान की जाए।

- इंजीनियरों को मानचित्र स्वीकृत कराने की सीमा को 500 स्क्वायर मीटर किया जा रहा है। इसे पहले की तरह दो हेक्टेयर ही किया जाए।

- मैदानी क्षेत्रों में एकल आवास के लिए न्यूनतम प्लॉट एरिया बढ़ाकर 50 मीटर किया जा रहा है, इसे 30 वर्ग मीटर ही रखा जाए। नाले से दूरी पहले ही तरह 5 मीटर रखी जाए।

- मैदानी क्षेत्रों में ओपन पार्किंग 23 वर्ग मीटर के स्थान पर 13.75 वर्ग मीटर की जाए। 250 वर्ग मीटर के मल्टीपल यूनिट में पार्श्व सैटबैक दो मीटर तथा साइड सैटबैक 1.2 मीटर किया जाए।

एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल इंजीनियर्स एंड टेक्निकल्स के बताए गए बिंदु शासन को प्रेषित किए जाएंगे। शासन स्तर पर जो भी निर्णय होगा, वह अमल में लाया जाएगा। - बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीए

आर्किटेक्ट बाेले- नए संसोधन से नहीं बन सकेंगी बहुमंजिला इमारत
देहरादून। बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन को लेकर आर्किटेक्ट्स ने भी बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। उत्तराखंड इंजीनियर्स एंड आर्किटेक्ट एसोसिएशन का कहना है कि संशोधन का नया प्रस्ताव प्रापर्टी कारोबार के लिए घातक है। इससे बहुमंजिला इमारत बना पाना संभव नहीं होगा। तीन मंजिल से अधिक ऊंचा भवन बनाने के लिए प्राधिकरण को बड़ी फीस चुकानी होगी, जो आम आदमी के लिए संभव नहीं होगा।

इस पर पुन: विचार किया जाना चाहिए। बृहस्पतिवार को आर्किटेक्ट एसोसिएशन की एमडीडीए में इस मुद्दे पर बैठक होगी। अध्यक्ष डीएस राणा ने कहा कि नया प्रस्ताव अमल में आया तो दून के पहाड़ी क्षेत्र में दो मंजिल से अधिक ऊंचा भवन बनाने के लिए ग्रीन बिल्डिंग बनवानी पड़ेगी। ऐसी बिल्डिंग बनाने वाली कोई एजेंसी देहरादून में नहीं है। वहीं, ग्रीन बिल्डिंग में सौर ऊर्जा का प्रयोग करना होगा। सीवेज निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाना होगा, जो कि अव्यवहारिक है। मा.सि.रि.

कहां से लाएंगे 40 फीट चौड़ी सड़क
पहले 25 फीट की सड़क पर दो मंजिल बिल्डिंग बनती थी। अब सड़क को 40 फीट चौड़ा बनाना होगा। आर्किटेक्ट्स के अनुसार एमडीडीए बताए कि शहर में कहां पर 40 फीट चौड़ी सड़क बनी हुई है। जब सड़क ही इतनी चौड़ी नहीं है तो ऐसा प्रस्ताव क्यों लाया जा रहा है।

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दो हजार मीटर का दायरा अव्यवहारिक
ग्रुप हाउसिंग के लिए जमीन का दायरा 1000 मीटर से बढ़ाकर 2000 मीटर कर दिया गया है। इससे सीधे तौर पर ग्रुप हाउसिंग प्रभावित होगी। आर्किटेक्ट्स का कहना है कि जब दून में जमीनें ही नहीं हैं, तो दायरा बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में सीधे तौर पर ग्रुप हाउसिंग का काम प्रभावित होगा।

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