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उत्तराखंडः सुरक्षित यात्रा की राह में 139 ‘शूल’, सरकार तेजी से चलाएगी ऑपरेशन ब्लैक स्पॉट

Wed, 11 Sep 2019 02:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 11 Sep 2019 02:44 PM IST
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operation black spot in uttarakhand
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

उत्तराखंड में सुरक्षित यात्रा की राह में ब्लैक स्पॉट के रूप में 139 शूल स्थित हैं। इन शूलों को मिटाने के लिए प्रदेश का लोक निर्माण विभाग अब आपरेशन ब्लैक स्पॉट शुरू करने जा रहा है। इस आपरेशन के पहले चरण में विभाग सड़कों पर दुर्घटनाओं के लिए बड़ा खतरा बनें 30 ब्लैक स्पॉट हटाएगी। इन ब्लैक स्पॉट का उपाचार 2020 तक कर दिया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर 18 करोड़ रुपये स्वीकृत होने जा रहे हैं। अपर मुख्य सचिव लोनिवि ओम प्रकाश ने इसकी पुष्टि की है।

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हर साल 950 मौतें
प्रदेश की सड़कों पर हर साल औसतन 950 मौतें हो रही हैं। सड़क हादसों में घायल होने वालों की तादाद इससे कई गुना अधिक है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी ने ऐसी दुर्घटना वाले 139 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं। लोनिवि, एनचएआई, राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय, बीआरओ को इन ब्लैक स्पॉट को ठीक करने के निर्देश हैं।
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दुर्घटना का ब्लैक स्पॉट 139 प्रदेश की सड़कों पर
38 राष्ट्रीय राजमार्गों पर
30 लोनिवि की सड़कों पर
67 एनएचएआई की सड़कों पर
01 बीएचईएल की सड़कों पर
03 बीआरओ की सड़कों पर

सबसे खतरनाक देहरादून की सड़कें
देहरादून जनपद की सड़कें सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। जनपद के भीतर स्थित राष्ट्रीय राजमार्गों और लोक निर्माण विभाग की प्रमुख सड़कों पर प्रदेश में सबसे अधिक 50 ब्लैक स्पॉट हैं।
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एनएच और लोनिवि की सड़कों पर ब्लैक स्पॉट
हरिद्वार            03
यूएस नगर        05
टिहरी            07
पौड़ी            02
नैनीताल        03
पिथौरागढ़     01
चंपावत         02
उत्तरकाशी    03
अल्मोड़ा        02
नैनीताल        03
चमोली        02

लोक निर्माण विभाग की सड़कों पर 30 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। जिन्हें 2020 तक ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है। ब्लैक स्पॉट ठीक करने के लिए 18 करोड़ रुपये जारी किए जा रहे हैं।

- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव, लोनिवि

दो तरह से हो रहा सुधार
ब्लैक स्पॉट दो तरीके से ठीक किए जा रहे हैं। पहला लघु कालीन सुधार है, जिसके तहत साइन बोर्ड, रंबल स्पीड ब्रेकर व गति नियंत्रण सरीखे उपाय कर दिए जाते हैं। दीर्घकालीन सुधार के तहत ब्लैक स्पॉट के सुधार के लिए बाकायदा डीपीआर तैयार होती है और एक स्थल को सुधारने में 50 लाख रुपये तक खर्च आ जाता है।

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