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पढ़िए, एक और 'अभिनंदन' की कहानी, पाक की प्रताड़ना और लालच नहीं तोड़ पाए थे इनका हौसला

Tue, 05 Mar 2019 07:58 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal करन दयाल, अमर उजाला, देहरादून
करन दयाल, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 05 Mar 2019 07:58 AM IST
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one more abhinandan in indian army who lives pakistan jail for one year one month
vijendra singh - फोटो : अमर उजाला

बाघा बार्डर पर विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान का स्वागत हो रहा था तो दून में कैप्टन विजेंद्र सिंह गुरुंग (सेनि) पाकिस्तान की जेल में बिताए दिनों को याद कर रहे थे। उन्हें पाकिस्तान ने 1971 के युद्ध में बंदी बना लिया था। भारतीय सेना के राज जानने के लिए दुश्मन ने उन्हें हर तरह प्रताड़ित किया। बात नहीं बनी तो लालच भी दिया, लेकिन देश के लिए मरने की कसम खा चुके विजेंद्र नहीं टूटे। आखिरकार एक साल और एक महीने बार वे रिहा हुए और विंग कमांडर अभिनंदन की तरह पूरे देश ने दिल खोकर उनका स्वागत किया था।

भारतीय सेना के राज जानने के लिए हर पैतरा अपनाया

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vijendra singh

1971 के युद्ध की यादें जोहड़ी गांव निवासी कैप्टन विजेंद्र सिंह गुरुंग की रग रग में बसी हैं। इन्हीं यादों को ताजा रखने के लिए उन्होंने अपने कमरे की दीवार पर भारत और पाकिस्तान की सीमा का चित्र बनवाया है। वे बताते हैं कि युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने लगभग 617 भारतीय जवानों को बंदी बना लिया था। दुश्मनों ने भारतीय सेना के राज जानने के लिए हर पैतरा अपनाया। लालच भी दिया, लेकिन विजेंद्र सिंह उनकी हर पेशकश को ठुकरा दिया। उन्होंने बताया कि  पाकिस्तानी अधिकारी अक्सर कहते, छोटू यहीं रुक जा तुझे पाकिस्तान का हीरो बना देंगे, बस भारतीय सेना के राज बता दे।

पाक में गुनगुनाए थे देशभक्ति के तराने

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vijendra singh

उन्होंने दुश्मन के हर प्रस्ताव के जवाब में बस यही कहा कि उन्हें देश से प्यारा कुछ नहीं है। उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान उन्हें सिर पर तीन गंभीर चोटें लगी थीं। जिसके चलते वे चार साल तक अस्पताल में भर्ती रहे। कैप्टन विजेंद्र सिंह गुरुंग गाने का भी शौक रखते हैं। अपने इसी हुनर से उन्होंने दुश्मन का भी दिल जीत लिया था। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने पाक अधिकारियों से मांग की थी कि उन्हें देशभक्ति के गीत गाने की अनुमति दी जाए।

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लौटने पर हुआ जोरदार स्वागत

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अटारी-वाघा बॉर्डर

विजेंद्र ने गाना शुरू किया तो पाक अधिकारी देखते रह गए। पाकिस्तानी अधिकारियों की मांग पर विजेंद्र सिंह ने छलके तेरी आंखों से शराब, गोविंदा आला रे... कव्वाली बेवफा तेरा यूं मुस्कुराना... की प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। एक साल एक महीने बाद भारत लौटने पर कैप्टन विजेंद्र सिंह गुरुंग का जोरदार स्वागत हुआ था। सड़कों पर उनके नाम के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए थे। उन पर लिखा था वेलकम दी वार हीरो। बाघा बॉर्डर पर उनका भव्य स्वागत किया गया था। वापस लौटने पर उन्हें दस दिन का अवकाश दिया गया था और बाद में असम में तैनात किया गया था।

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Captain Satender Singh Gurung

1971 के युद्ध में कैप्टन विजेंद्र के चचेरे भाई कैप्टन सतेंद्र सिंह गुरुंग (सेवानिवृत्त) भी शामिल हुए थे। दोनों भाइयों ने कई मौकों पर एकसाथ मिलकर दुश्मन से लोहा लिया था। दोनों भाइयों ने एक-दूसरे से वादा किया था कि दुश्मन का सफाया कर के ही दम लेंगे। कै. विजेंद्र बताते हैं कि पाकिस्तान शैतानी नियत वाला देश है। इसका सबूत वह बार-बार दे चुका है। हाल में ही आतंकी ठिकानों पर हुई एयर स्ट्राइक पर उन्होंने वायुसेना के जांबाजों को बधाई भी दी।

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