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Dehradun News: बिना लाइसेंस शराब पिलाने के 15 साल पुराने मामले में रेस्टोरेंट मालिक दोषी
Thu, 24 Sep 2026 09:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Thu, 24 Sep 2026 09:31 PM IST
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सहसपुर मुख्य बाजार स्थित एक रेस्टोरेंट में बिना लाइसेंस शराब पिलाने के 15 साल पुराने मामले में अदालत ने बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट जतिन मित्तल की अदालत ने अंकित रेस्टोरेंट के मालिक अंकित मिगलानी को दोषी करार देते हुए जेल में बिताई गई अवधि की सजा और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 जनवरी 2011 की शाम करीब 7:10 बजे सहसपुर मुख्य बाजार स्थित अंकित रेस्टोरेंट में ग्राहकों को बिना लाइसेंस शराब पीने-पिलाने का मामला सामने आया था। इस पर पुलिस ने रेस्टोरेंट संचालक अंकित मिगलानी के खिलाफ आबकारी अधिनियम और रेस्टोरेंट अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी अंकित अदालत में पेश हुआ और उसने स्वेच्छा से अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने भविष्य में दोबारा ऐसा कृत्य न करने का आश्वासन दिया। सजा पर सुनवाई के दौरान उसने अदालत को अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की गुहार लगाई। अदालत ने आरोपी के जुर्म कबूलने पर उसे दोषी करार दिया और पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को ही सजा मानते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी अर्थदंड नहीं चुकाता है, तो उसे पांच दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 जनवरी 2011 की शाम करीब 7:10 बजे सहसपुर मुख्य बाजार स्थित अंकित रेस्टोरेंट में ग्राहकों को बिना लाइसेंस शराब पीने-पिलाने का मामला सामने आया था। इस पर पुलिस ने रेस्टोरेंट संचालक अंकित मिगलानी के खिलाफ आबकारी अधिनियम और रेस्टोरेंट अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
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बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी अंकित अदालत में पेश हुआ और उसने स्वेच्छा से अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने भविष्य में दोबारा ऐसा कृत्य न करने का आश्वासन दिया। सजा पर सुनवाई के दौरान उसने अदालत को अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की गुहार लगाई। अदालत ने आरोपी के जुर्म कबूलने पर उसे दोषी करार दिया और पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को ही सजा मानते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी अर्थदंड नहीं चुकाता है, तो उसे पांच दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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