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अवैध खनन न रोक पाने पर एसडीएम बर्खास्त
अमर उजाला, विकासनगर
Updated Sat, 28 Dec 2013 12:10 PM IST
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यह पहला मौका है जब अवैध खनन के मामले में किसी एसडीएम के खिलाफ शासन ने इतना कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रशासन ने अवैध खनन के खिलाफ ढुलमुल रवैया अपनाने वाले एसडीएम अरविंद कुमार पांडेय को बर्खास्त कर दिया है।
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हाईकोर्ट ने लगाई है रोक
अपनाते हुए क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन का खेल किसी से छिपा नहीं है। तहसील और पुलिस प्रशासन की लचर कार्यशैली के चलते खनन माफिया नदियों को छलनी करने पर आमादा हैं। हाईकोर्ट ने जून 2009 से यमुना वैली की सभी नदियों पर अवैध खनन पर रोक लगाई हुई है।
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इससे पहले यहां रहे एसडीएम एनएस डांगी ने ढकरानी रेंज में अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाया था। डांगी ने अवैध खनन से भरे 18 वाहनों को सीज कर दिया था।
उनके बाद आए एसडीएम अशोक कुमार पांडेय ने भी बाड़वाला में अवैध खनन के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था। उन्होंने करीब 20 वाहनों को सीज कर दिया था। अभियान के दौरान पांडेय का स्थानांतरण कालसी कर दिया गया था।
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अवैध खनन के खिलाफ एसडीएम पांडेय के सख्त रुख अपनाने के चलते मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हस्तक्षेप करते हुए उनका स्थानांतरण रोक दिया था। एके पांडेय का अक्तूबर माह में स्थानांतरण होने पर अरविंद कुमार पांडेय यहां के एसडीएम बने।
जानकारी के बाद भी नहीं की कार्रवाई
दो अक्तूबर को तहसील का चार्ज संभालने वाले निलंबित एसडीएम अरविंद कुमार पांडेय ने अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने से दूरी बनाए रखी। जिला प्रशासन द्वारा यमुना में आवंटित लॉटों में निर्धारित सीमा के बाहर भी धड़ल्ले से हो रहे अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थी।
जानकारी मिलने के बावजूद एसडीएम अरविंद पांडेय ने कभी भी खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। जिसका खामियाजा उन्हें निलंबन के रूप में उठाना पड़ा।
भूमाफियाओं की जंग में अफसर चढ़ रहे बलि
जमीन और बालू माफियाओं की जंग के बीच में जो अफसर पड़ा कार्रवाई का फंदा देर-सवेर उसी के गले पड़ता है। अलबत्ता जिस भूमाफिया के शासन, प्रशासन के ऊंचे ओहदों पर बैठे आकाओं का पलड़ा भारी होता है उसके विरोधी अफसरों की शामत आ जाती है। भूमाफिया अफसरों को अपने गठजोड़ में शामिल कर उनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
पहले भी लगे हैं आरोप
बालू खनन के मामले में सस्पेंड एसडीएम विकासनगर अरविंद पांडेय पर पहले भी आरोप लगे हैं। हरिद्वार तैनाती के दौरान ग्राम हरिवाला के राजकुमार चौहान ने उन पर सिंचाई विभाग की जमीन का भूमि अधिकार देने का आरोप लगाया था।
चौहान ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मानवाधिकार आयोग (दिल्ली और उत्तराखंड), एसपी विजिलेंस और सचिव कार्मिक विभाग से की थी। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब गोट फंसी तो कार्रवाई की तलवार उन्हीं के सिर पर आ गिरी।
अरविंद पांडेय पर भूमाफियाओं से संबंध का भी आरोप लगा था। अरविंद पांडेय ऐसे अकेले अफसर नहीं हैं।
इनकी भी हुई थी जांच
नकरौंदा में कुबेर भूमि प्रकरण के मामले की आंच भी दो तहसीलदारों, एसडीएम और एडीएम पर आई थी। मामला अभी फाइनल नहीं हुआ है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है।
लोगों का कहना है कि भूमाफियाओं और रियल इस्टेट कंपनियों की पहुंच ऊपर तक होने से अधिकारी संजाल का अंग बनने में सुरक्षा महसूस करने लगते हैं। शीर्ष पर उलट-फेर होते ही वे बलि का बकरा बन जाते हैं।