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रायपुर में विधानसभा बनाने के पीछे है 'गहरी साजिश'
प्रेम प्रताप सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 15 Dec 2013 11:50 AM IST
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देहरादून में अपने फायदे के लिए नेताओं-नौकरशाहों ने करीब पांच किलोमीटर के दायरे में जंगलों के सफाए की पूरी योजना बना ली है।
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फैसले के पीछे छुपा हैं जमीनों का धंधा
बात हो रही रायपुर में प्रस्तावित विधानसभा भवन की। यहां विधानसभा बनाने के निर्णय के पीछे जमीनों के धंधे से जुड़ी गहरी साजिश की बू आ रही है। सूत्रों की मानें तो रायपुर, थानो और आसपास के क्षेत्रों में प्रदेश के कई नौकरशाह और नेता बेनामी प्रॉपर्टी खरीद चुके हैं।
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आम आदमी से बेहद सस्ते दामों पर जमीनें खरीदी गई हैं, लेकिन आसपास घना जंगल होने से यहां दाम नहीं बढ़ने से वे परेशान थे। सूत्रों के मुताबिक एक बड़ी पार्टी के नेता के रिश्तेदार की भी यहां काफी बेनामी संपत्ति है।
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यही वजह रही कि अफसर और नेता जौलीग्रांट से रायपुर तक फोर लेन सड़क बनाने पर जोर देते रहे, लेकिन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस पर ब्रेक लगा दिया।
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यह प्लान फेल हुआ तो इस क्षेत्र में विधानसभा, सचिवालय बनाने की तैयारी की गई, जिसे मंजूरी भी मिल गई। इस पूरी कवायद में नेता-नौकरशाह तो मालामाल हो जाएंगे, लेकिन वन्यजीवों को खासा नुकसान होगा।
..तो विधानसभा में घुसेंगे हाथी
रायपुर में जंगल के नजदीक विधानसभा और सचिवालय बनाने का निर्णय भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्षों का सबब बन सकता है। यहां निर्माण होने से हाथी, गुलदार, हिरन, मोर का वासस्थल प्रभावित होगा।
रायपुर स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज में तो कई बार हिरन टहलते नजर आते हैं। हाथी ऋषिकेश, थानो होते हुए हर साल रायपुर आते हैं। लेकिन विधानसभा बनने से उनका कारिडोर प्रभावित होगा। जाहिर है, इससे गुस्साए हाथी आम जनता पर हमले करने लगेंगे।
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यही हाल गुलदारों का भी रहेगा। हाथी-गुलदार हमले करेंगे तो शासन इन्हें मारने का आदेश भी जारी करेगा। कुल मिलाकर विधानसभा बनने का खामियाजा वन्यजीवों को ही भुगतना होगा।