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उत्तराखंड में अब मासिक परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर अब परखे जाएंगे शिक्षक

Thu, 21 Nov 2019 08:53 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 21 Nov 2019 08:53 AM IST
सार

  • आउट स्टैंडिंग से लेकर सामान्य से कम तक की श्रेणी तय, उच्चतम श्रेणी के शिक्षक बनेंगे ‘मेंटर’

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Now teachers will tested on basis of monthly exam results in Uttarakhand
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

बोर्ड परीक्षा के बाद अब शिक्षा विभाग मासिक परीक्षाओं के आधार पर भी शिक्षकों की रेटिंग करेगा। इसके लिए पांच श्रेणियां तय कर दी गई हैं। सबसे उच्च श्रेणी के शिक्षकों को अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का जिम्मा दिया जाएगा। 

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शिक्षा में सुधार के तहत विभाग पहले से ही बोर्ड परीक्षा में छात्रों के नंबरों के आधार पर शिक्षकों के मूल्यांकन की बात करता रहा है। शिक्षा सचिव आर मिनाक्षी सुंदरम के मुताबिक अब शिक्षकों की रेटिंग मासिक परीक्षा में छात्रों के परीक्षा परिणाम के आधार पर भी की जाएगी। मासिक परीक्षा सरकारी विद्यालयों में एक साल पहले शुरू की गई थी।
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शिक्षा सचिव के मुताबिक इस एक साल के औसत परीक्षा परिणाम के आधार पर पांच श्रेणियां तय की गईं हैं। पहली श्रेणी आउट स्टैंडिंग, दूसरी वेरी गुड, तीसरी गुड, चौथी एवरेज या सामान्य और पांचवीं बिलो एवरेज या सामान्य से कम की होगी। सबसे उच्च श्रेणी के शिक्षकों को मेंटर टीचर बनाया जाएगा और यह शिक्षक अन्य शिक्षकों को बताएंगे कि कैसे परीक्षा में छात्रों से बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है।  

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देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी

शासन की ओर से देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी भी जारी की गई है। शिक्षा सचिव के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों में मुख्य शिक्षा अधिकारियों को कहा गया था कि वे बताएं कि किन विद्यालयों में सरप्लस शिक्षक हैं और कहां कमी हैं।

दस जिलों ने इसमें बेहतर काम किया है और तीन जिलोें का काम संतोषजनक नहीं पाया गया है। इन तीनों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी जारी की गई है और फिर भी इनका प्रदर्शन नहीं सुधरा तो प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। 

2022 तक कोई स्कूल नहीं होगा भवन विहीन

बताया गया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत 2022 तक सभी स्कूलों को भवन, फर्नीचर, पेयजल आदि उपलब्ध कराया जाना है। प्रदेश में 50 ऐसे विद्यालय हैं, जिनके पास अपने भवन नहीं हैं। इसी तरह प्रत्येक स्कूल में फर्नीचर, शौचालय, पेयजल आदि की व्यवस्था भी की जानी है। इसके लिए होमवर्क किया जा रहा है और राज्य वित्त के अतिरिक्त, नाबार्ड आदि से भी मदद ली जाएगी। इसके बाद  शेष बची धनराशि की व्यवस्था को जुटाने के लिए तरीका निकाला जाएगा। 

थर्ड पार्टी एसेसमेंट के लिए जल्द तय होगी एजेंसी

शिक्षा विभाग ने अब स्कूलों के लर्निंग आउटकम को लेकर थर्ड पार्टी एसेसमेंट की ओर भी कदम बढ़ा लिया है। शिक्षा सचिव के मुताबिक जल्द ही एक जिम्मेदार एजेंसी का यह काम सौंपा जाएगा।

25 नवंबर को सीएस करेंगे समीक्षा

25 नवंबर को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह शिक्षा से संबंधित मुख्यमंत्री की घोषणाओं और अन्य मामलों की समीक्षा करेंगे। बुधवार को शिक्षा सचिव ने इस संदर्भ में अधिकारियों के साथ बैठक भी की। 

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