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अब आसानी से नहीं मिलेगी आयुष कॉलेजों को मान्यता
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देहरादून। अब बीएएमएस और बीयूएमएस कोर्स संचालित करने के लिए मान्यता आसान नहीं होगी। सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) ने मान्यता के नियम सख्त कर दिए हैं। यह नियम इसी साल से लागू कर दिए गए हैं।
सीसीआईएम ने मान्यता के नियम काफी हद तक मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की तरह कर दिए हैं। सत्र 2020-21 की मान्यता के लिए अब पूर्ण रूप से गोपनीय निरीक्षण कराया जाएगा। कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं, भवन, क्लासरूम आदि के साथ ही इस बार से मरीजों की ओपीडी भी अनिवार्य कर दी गई है। किसी भी आयुष कॉलेज को मान्यता के लिए अपने अस्पताल में रोजाना कम से कम 200 मरीज की ओपीडी करनी होगी। इतनी ओपीडी होने के बाद ही बीएएमएस की 100 सीटें मिल पाएंगी। इससे कम ओपीडी होने पर मान्यता की राह मुश्किल हो जाएगी। सीसीआईएम के मुताबिक किसी भी कॉलेज को बीएएमएस की 100 सीटों की मान्यता के लिए सालभर में कम से कम 73 हजार ओपीडी और कम से कम 8760 आईपीडी भर्ती मरीज होने चाहिए।
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ी आयुष कॉलेजों की संख्या
प्रदेश में बीते पांच साल में आयुष कॉलेजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में यहां आयुर्वेद विवि के तीन परिसर के अलावा हिमालयीय आयुर्वेदिक पीजी मेडिकल कॉलेज, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज, देहरादून, क्वाड्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, रुड़की, ओम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार, मदरहुड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार, शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च, झाझरा, उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार, चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर, दून इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद फैकल्टी मेडिकल साइंसेज, सहसपुर, देवभूमि मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल, देहरादून, बिहाईव आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सेलाकुई, पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार संचालित हो रहे हैं।
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सीसीआईएम ने मान्यता के नियम काफी हद तक मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की तरह कर दिए हैं। सत्र 2020-21 की मान्यता के लिए अब पूर्ण रूप से गोपनीय निरीक्षण कराया जाएगा। कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं, भवन, क्लासरूम आदि के साथ ही इस बार से मरीजों की ओपीडी भी अनिवार्य कर दी गई है। किसी भी आयुष कॉलेज को मान्यता के लिए अपने अस्पताल में रोजाना कम से कम 200 मरीज की ओपीडी करनी होगी। इतनी ओपीडी होने के बाद ही बीएएमएस की 100 सीटें मिल पाएंगी। इससे कम ओपीडी होने पर मान्यता की राह मुश्किल हो जाएगी। सीसीआईएम के मुताबिक किसी भी कॉलेज को बीएएमएस की 100 सीटों की मान्यता के लिए सालभर में कम से कम 73 हजार ओपीडी और कम से कम 8760 आईपीडी भर्ती मरीज होने चाहिए।
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उत्तराखंड में तेजी से बढ़ी आयुष कॉलेजों की संख्या
प्रदेश में बीते पांच साल में आयुष कॉलेजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में यहां आयुर्वेद विवि के तीन परिसर के अलावा हिमालयीय आयुर्वेदिक पीजी मेडिकल कॉलेज, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज, देहरादून, क्वाड्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, रुड़की, ओम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार, मदरहुड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार, शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च, झाझरा, उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार, चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर, दून इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद फैकल्टी मेडिकल साइंसेज, सहसपुर, देवभूमि मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल, देहरादून, बिहाईव आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सेलाकुई, पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार संचालित हो रहे हैं।
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