{"_id":"6244a6c40ccb7561b864cde3","slug":"notice-to-467-hospitals-of-the-district-for-not-updating-the-clinical-establishment-act-city-news-drn4077692197","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में नवीनकरण न कराने पर जिले के 467 अस्पतालों को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में नवीनकरण न कराने पर जिले के 467 अस्पतालों को नोटिस
विज्ञापन
जिले के 467 अस्पतालों द्वारा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण का नवीनीकरण न कराए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने उनके संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में कहा गया है कि पंजीकरण की वैधता तिथि कई दिन पहले समाप्त हो चुकी है, इसलिए अस्पताल संचालक जल्द से जल्द हर हालत में नवीनीकरण करा लें। ऐसा न होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता व बेहतरी के उद्देश्य से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू किया गया है। जबकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) इसे तर्कसंगत न मानते हुए संशोधन चाहता है। जिसमें 50 बेड क्षमता वाले अस्पतालों को एक्ट से बाहर रखने, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तहत ईटीपी व एसटीपी व्यवस्था में छूट, अस्थायी पंजीकरण के नवीनीकरण के शुल्क में छूट समेत अन्य मांग आईएमए पदाधिकारी कर रहे हैं। इस मसले पर शासन और आईएमए के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन हल नहीं निकल पाया है।
वहीं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज उप्रेती ने ऐसे अस्पतालों को पंजीकरण के नवीनीकरण का नोटिस जारी किया है। इसमें एलोपैथिक, डेंटल, आयुर्वेदिक सहित अन्य चिकित्सा पद्धति से जुड़े अस्पताल भी शामिल हैैं। कुछ ऐसे भी अस्पताल हैैं जिनका आवेदन निरस्त हो चुका है। यह भी जानकारी नहीं है कि अस्पताल अभी संचालित भी हो रहा है या बंद है। इस स्थिति में सात दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। आईएमए दून शाखा के अध्यक्ष डॉ. आलोक सेमवाल ने बताया कि इस बारे में चर्चा हुई है। आईएमए से जुड़े डॉक्टरों को पंजीकरण के नवीनीकरण को कहा गया है। यह कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। जहां तक एक्ट में संशोधन का प्रश्न है, यह मामला अंतिम चरण में है। विधानसभा चुनाव के कारण इसमें व्यवधान पड़ा। उम्मीद है कि सरकार व शासन जल्द इसमें निर्णय लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता व बेहतरी के उद्देश्य से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू किया गया है। जबकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) इसे तर्कसंगत न मानते हुए संशोधन चाहता है। जिसमें 50 बेड क्षमता वाले अस्पतालों को एक्ट से बाहर रखने, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तहत ईटीपी व एसटीपी व्यवस्था में छूट, अस्थायी पंजीकरण के नवीनीकरण के शुल्क में छूट समेत अन्य मांग आईएमए पदाधिकारी कर रहे हैं। इस मसले पर शासन और आईएमए के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन हल नहीं निकल पाया है।
विज्ञापन
वहीं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज उप्रेती ने ऐसे अस्पतालों को पंजीकरण के नवीनीकरण का नोटिस जारी किया है। इसमें एलोपैथिक, डेंटल, आयुर्वेदिक सहित अन्य चिकित्सा पद्धति से जुड़े अस्पताल भी शामिल हैैं। कुछ ऐसे भी अस्पताल हैैं जिनका आवेदन निरस्त हो चुका है। यह भी जानकारी नहीं है कि अस्पताल अभी संचालित भी हो रहा है या बंद है। इस स्थिति में सात दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। आईएमए दून शाखा के अध्यक्ष डॉ. आलोक सेमवाल ने बताया कि इस बारे में चर्चा हुई है। आईएमए से जुड़े डॉक्टरों को पंजीकरण के नवीनीकरण को कहा गया है। यह कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। जहां तक एक्ट में संशोधन का प्रश्न है, यह मामला अंतिम चरण में है। विधानसभा चुनाव के कारण इसमें व्यवधान पड़ा। उम्मीद है कि सरकार व शासन जल्द इसमें निर्णय लेंगे।
विज्ञापन