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नोटबंदी से संकट में मिड डे मील, भोजनमाताओं की पेमेंट अटकी

Fri, 25 Nov 2016 01:48 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 25 Nov 2016 01:48 AM IST
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noteban effect on mid day meal.
नोट

जिला सहकारी बैंकों में नोट बंदी और नए कैश की कमी के कारण मिड डे मील पर संकट आ गया है। स्थिति यहां तक हो गई है कि भोजनमाताओं की पेमेंट तक अटक गई है। जल्द ही कोई हल नहीं निकला तो आने वाले समय में हालात और बदतर हो सकते हैं।

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प्रदेश में जिला सहकारी बैंकों की 247 शाखाएं हैं। इनमें प्रदेश के कुल मिड डे मील खातों के करीब 70 प्रतिशत खाते हैं। इन खातों में मिड डे मील के अलावा पोषण भत्ता और भोजनमाताओं का पैसा भी आता है। यहां से पैसा निकालकर इन योजनाओं को अमल में लाया जा रहा है। लेकिन बीते कई दिनों से जिला सहकारी बैंकों में 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने और बेहद कम मात्रा में नई करेंसी आने की वजह से यह योजनाएं लड़खड़ा गई हैं।
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जिला सहकारी बैंक के निदेशक मानवेंद्र सिंह ने बताया कि जल्द कोई ठोस हल नहीं निकला तो तमाम खातों में परेशानी पैदा हो जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि आरबीआई की रोक की वजह से उनके चालू खाताधारक यहां से शिफ्ट होने शुरू हो गए हैं।
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मिड डे मील जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं संकट में आ गई है। उन्होंने सरकार और आरबीआई से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का हल निकालें।

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