उत्तराखंड के CM के खिलाफ जारी हुआ गैर जमानती वारंट
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत, खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल एवं विधायक कुंवर प्रणव सिंह के खिलाफ सोमवार को गैर जमानती वारंट जारी किए गए।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान मंगलौर में आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुजीत कुमार ने यह वारंट जारी किए हैं।
कोर्ट में पेश होने के लिए 23 जून की तिथि निर्धारित की है।
2009 में थानाध्यक्ष ने दर्ज कराया था मामला
अभियोजन पक्ष ने बताया कि 30 मार्च 2009 को लोकसभा चुनाव में आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में मंगलौर के तत्कालीन प्रभारी थानाध्यक्ष गोविंद सिंह रावत ने यह मामला दर्ज कराया था।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह और 250 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ यह मामला दर्ज कराया गया था।
आरोप था कि प्रचार के दौरान जनता को प्रलोभन देने के लिए मिठाई भी बांटी थी। सभा के दौरान पार्किंग व्यवस्था न होने से 50-60 वाहनों का काफिला एकत्र होने पर सड़क पर जाम लग गया था। इससे धारा 144 का उल्लंघन किया गया।
कोर्ट में इनके खिलाफ दाखिल किए गए थे आरोप पत्र
पुलिस ने जांच के बाद चार मई 2010 को न्यायालय में चौधरी राजेंद्र सिंह पुत्र धर्मसिंह निवासी लखनौता मंगलौर, तत्कालीन सांसद एवं केंद्रीय मंत्री हरीश रावत पुत्र राजे सिंह निवासी मोहनरी अल्मोड़ा, विधायक कुंवर प्रणव सिंह, और दिनेश अग्रवाल पुत्र रतिराम निवासी लक्ष्मण चौक देहरादून के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए थे।
कोर्ट ने संज्ञान लेकर उक्त लोगों को तीन जून 2010 को तलब किया था। कोर्ट में उपस्थित न होने पर 12 अगस्त 2011 को जमानती वारंट जारी हुए थे।
जबकि 13 मार्च 2013 को गैर जमानती वारंट जारी हुए। छह अगस्त 2013 जिलाध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह ने अपनी जमानत करवा ली थी।
22 मई को कोर्ट ने जारी किए गैर जमानत वारंट
19 मार्च 2014 को सांसद व विधायक के खिलाफ मामला होने के कारण उक्त पत्रावली द्वितीय अपर सिविल जज जेडी/न्यायिक मजिस्ट्रेट रुड़की की ओर से सीजेएम को उचित मार्गदर्शन के लिए पत्र लिखा गया।
17 अप्रैल 2014 पत्रावली सीजेएम कोर्ट हरिद्वार में स्थानांतरित हो गई।
22 मई 2014 को कोर्ट ने मुख्यमंत्री हरीश रावत, खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल और विधायक कुंवर प्रणव सिंह के कोर्ट में उपस्थित न होने के कारण उनके खिलाफ गैर जमानत वारंट जारी किए।
जनता को बरगला रही सरकार
माकपा नेता इंद्रेश मैखुरी ने प्रदेश कांग्रेस सरकार पर गैरसैंण के नाम पर जनता को बरगलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भराड़ीसैंण में ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र चलाने की बात कहने वाली सरकार पहले यह स्पष्ट करे, कि 13 जिलों के छोटे से राज्य उत्तराखंड में कितनी विधानसभाएं होनी चाहिए।
पंचायत चुनाव से ठीक पहले भराड़ीसैंण में तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन सत्र का सीधा मतलब यह है कि हरीश रावत की सरकार पंचायत चुनाव नहीं कराना चाहती है। बल्कि अपनी नैया पार लगाने का प्रयास करने में जुटी है।
दूसरी ओर भाजपा ने भी गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन विधानसभा सत्र को कांग्रेस सरकार का पंचायती चुनाव स्टंट बताया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश पुजारी, जिला उपाध्यक्ष रमेश मैखुरी, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र डिमरी, महिपाल सिंह नेगी आदि का कहना है कि पूर्व में हुए आयोजनों के बाद भी गैरसैंण की तस्वीर नहीं बदल पाई है।