चुनाव की अनोखी कहानी, पर्चा-खर्चा और चर्चा
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16वीं लोकसभा में लिए उत्तराखंड में उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करने में तेजी आई है। मंगलवार 13 उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी पेश की लेकिन हरिद्वार में कांग्रेस उम्मीदवार रेणुका रावत और बसपा उम्मीदवार मो. इस्लाम का अधूरा पर्चा चर्चा में रहा।
सभी कॉलम और संबंधित दस्तावेज पूरे करने के चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों का उम्मीदवारों की मुसीबतें बढ़ा रहे हैं।
प्रदेश में नामांकन प्रक्रिया 12 अप्रैल से शुरू हुई है लेकिन अधिकतर उम्मीदवार अंतिम तारीखों में ही नामांकन करना चाहते हैं। इसका सीधा कारण चुनावी खर्चा है जो उम्मीदवारी के दिन से ही शुरू हो जाता है।
गणित पूरी, नामांकन पीछे करना जरूरी
शुभ मुहूर्त ही नहीं बल्कि खर्च की चिंता भी लोकसभा के कई रणबांकुरों को नामांकन से रोक रही है। नामांकन के तुरंत बाद से ही खर्च का मीटर घूमना शुरू हो जाता है और चुनावी सभाओं का खर्च भी प्रत्याशी के खाते में दर्ज होता है।
ऐसे में कई हैवीवेट प्रत्याशी चुनावी खर्च बचाने के लिए नामांकन को पीछे खिसकाना बेहतर मान रहे हैं। नामांकन हो जाने के बाद इनकी चुनावी सभाओं से लेकर हेलीकाप्टर तक के प्रयोग का खर्च इन्हें खुद ही उठाना होगा।
प्रदेश में 19 अप्रैल को नामांकन का अंतिम दिन है। 2009 के लोक सभा चुनाव में करीब 76 प्रत्याशी मैदान में थे। 12 अप्रैल से शुरू हुए नामांकन में अभी तक करीब 20 प्रत्याशियों ने नामांकन भरा है। कांग्रेस में अभी हरक सिंह रावत और साकेत बहुगुणा ने पर्चा दाखिल नहीं किया है।
भाजपा के चार प्रत्याशी 17 को करेंगे नामांकन
भाजपा के भी चार प्रत्याशियों भुवन चंद्र खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक, रानी माला राज्यलक्ष्मी शाह और अजय टम्टा का नामांकन अभी नहीं हुआ है जो एक साथ 17 अप्रैल को एक दिन ही करा रहे हैं।
बसपा के तीन प्रत्याशी अभी नामांकन नहीं करा रहे हैं। जाहिर है कि इन सबको नामांकन के लिए किसी खास दिन का इंतजार है।
पौड़ी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार हरक सिंह रावत 19 को यानी अंतिम दिन नामांकन कराएंगे। बसपा टिहरी में 17 को और पौड़ी में 16 को नामांकन कराएगी। साफ है कि यह कोशिश नामांकन ऐन वक्त पर कराने की है।
नेताओं की मानें तो इसके पीछे शुभ मुहूर्त की कम और खर्च बचाने की चिंता अधिक है। इस बार चुनाव खर्च की सीमा 72 लाख हो गई है पर कीमत भी इसी हिसाब से बढ़ी हैं। ऐसे में प्रत्याशियों को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ रहा है।
प्रचार सामग्री पार्टियों से मंगाई जा रही है। बैनर प्रत्याशियों को अपने खर्च में ही शामिल करने पड़ रहे हैं। नामांकन के बाद वाहन का खर्च भी चुनाव खर्च में शामिल होगा। ऐसे में प्रदेश की बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को हेलीकाप्टर का प्रयोग भी संभलकर करना होगा।
लाव-लश्कर पूरा पर पर्चा अधूरा
हरिद्वार की हॉट सीट से लड़ रही मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत का नामांकन कराने केलिए पूरी सरकार मौजूद थी, लेकिन दाखिल पर्चा आधा-अधूरा ही रह गया। कांग्रेस प्रत्याशी ने अपना नामांकन दाखिल करने के लिए एक घंटा इंतजार भी किया।
पहले उनके नामांकन पत्र के साथ लगने वाले प्रपत्र नहीं मौजूद थे। जैसे-तैसे उन्होंने नामांकन दाखिल किया लेकिन शपथ पत्र भी निर्धारित प्रारूप पर नहीं था। जिसके चलते उनका नामांकन पत्र अधूरा दाखिल हुआ है। संबंधित दस्तावेज उन्हें दाखिल कराने होंगे।
जरूरी कागजात लेकर नहीं पहुंची रेणुका
रेणुका के नामांकन को लेकर गंगा किनारे जनसभा रखी गई थी। नामांकन के लिए तय समय डेढ़ बजे का था। जिसके चलते रेणुका बिना समर्थकों के करीब 12.40 बजे वहां से नामांकन के लिए निकल गई थीं।
रेणुका करीब 1:20 बजे रोशनाबाद पहुंच गई थी। बाहर समर्थकों से मिलने के बाद वह करीब पौने दो बजे नामांकन के लिए कलेक्ट्रेट में दाखिल हुई। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य, विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन आदि प्रस्तावक भी थे।
रेणुका कार्यालय तो पहुंच गई लेकिन अंदर जाने के बाद पता चला कि पर्चा भरने के लिए जरूरी प्रपत्र उनके पास नहीं हैं। अंदर बैठीं रेणुका और अन्य नेता फोन मिलाते रहे। करीब एक घंटा बाद एक कार्यकर्ता प्रपत्र लेकर अंदर पहुंचा और करीब पौने तीन बजे नामांकन दाखिल हो सका। कांग्रेस की ओर से बताया कि जिस कार्यकर्ता के पास प्रपत्र थे वह जाम में फंस गया था।
बसपा प्रत्याशी ने खाली छोड़ दिए कॉलम
निर्वाचन अधिकारी की ओर से बसपा प्रत्याशी हाजी इस्लाम को भी मेमो दिया गया है। बसपा प्रत्याशी ने अपने नामांकन पत्र में कई कॉलम खाली छोड़ दिए थे। उनका पर्चा भी अधूरा है।
खाली कॉलम का प्रत्याशी फायदा उठा सकते हैं। इसलिए निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि जो कॉलम लागू नहीं होते उनमें लागू नहीं अंकित किया जाए।
गौरतलब है कि भाजपा नेता नरेंद्र मोदी ने गुजरात विधानसभा के चुनाव में पत्नी का कॉलम खाली छोड़ दिया था जबकि इस बार लोकसभा चुनाव में कॉलम भरने की अनिवार्यता के चलते उन्हें पत्नी का नाम भरना पड़ा और उनकी शादी देशभर में चर्चा का विषय बनी।