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कर्मचारियों को तोहफा, लेकिन नाराजगी बरकरार

Fri, 06 Dec 2013 12:38 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 06 Dec 2013 12:38 PM IST
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no work on pay rule ends for state employee

उत्तराखंड सरकार कर्मचारियों को शांत रखने की हरसंभव कोशिश कर रही है। इसी क्रम में नो वर्क-नो पे के नियम को दरकिनार करते हुए हड़ताल अवधि का वेतन देने का फैसला किया गया है।

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बोनस भी रुक गया था
इसका शासनादेश गुरुवार शाम को जारी कर दिया गया। विभिन्न मांगों के समर्थन में 21 दिन तक हड़ताल पर रहे राज्य कर्मचारियों को दो माह का वेतन नहीं मिल पाया था। कई कर्मचारियों का बोनस भी रुक गया था।
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पिछले लंबे समय से इस बात को लेकर कर्मचारी नाराज थे। यह मामला मुख्यमंत्री के स्तर पर लंबित था और कैबिनेट टलने से यह फाइल भी अटक गई थी। गुरुवार को सहमति बनने पर इसका आदेश जारी कर दिया गया।

मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कर्मचारियों को 4200 ग्रेड-पे का आदेश और वेतन विसंगति समिति की बैठक जल्द कराने का भी आश्वासन दिया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह केमुताबिक इस मांग से परिषद किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेगी।

भीमताल को बी-2 श्रेणी
इसी के साथ प्रमुख सचिव वित्त राकेश शर्मा ने भीमताल को बी-2 श्रेणी का आदेश भी जारी कर दिया। इससे भीमताल में तैनात राज्य कर्मचारियों को अब 40 की बजाय 75 प्रतिशत मकान किराया भत्ता मिलेगा।

मसलन 4200 ग्रेड-पे वाले कर्मचारियों को पहले 1680 रुपए मकान किराया भत्ता मिलता था, अब उन्हें 3150 रुपए मिलेगा।

....फिर हटना पड़ा पीछे
नो वर्क नो पे का फैसला बाकायदा कैबिनेट के जरिए करने वाली सरकार को फिर कर्मचारियों के आगे झुकना पड़ा।

मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान सरकार ने साफ फैसला किया था कि कर्मचारियों को हड़ताल अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा।

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उस समय की हड़ताल के तुरंत बाद ही कर्मचारियों के उपार्जित अवकाश से समायोजन कर लिया गया। इस बार भी सरकार ने यही किया।

कई संगठन हड़ताल पर जाने की तैयारी में
सरकार की भरसक कोशिश के बावजूद निगमों से लेकर कई विभागों के कर्मचारी खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार उनकी बात सुनने तक को तैयार नहीं है। कई कर्मचारी संगठन धरना प्रदर्शन कर नाराजगी का इजहार लगातार कर रहे हैं।

अधिकतर विभागों के कर्मचारियों की मांग वेतन विसंगतियों को लेकर ही है। विभागों का पुनर्गठन न होने से कई विभागों में कर्मचारियों की पदोन्नतियों का मामला भी लटका हुआ है। कलेक्ट्रेट से लेकर लोगों से सीधे जुड़े कई विभागों के कर्मचारी भी इन्हीं सब मांगों को लेकर या तो हड़ताल पर हैं या फिर जाने की तैयारी में हैं।

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प्रदेश में एक बड़ी तादाद संविदा कर्मचारियों की है। उनको नियमित करने का वादा सरकार ने किया था। अब कैबिनेट के इंतजार में यह मसला अटका हुआ है।

इससे खफा संविदा कर्मचारी भी आंदोलन का बिगुल फूंक रहे हैं। पर्वतीय जिलों के पटवारी भी फिर से हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं।

समझौते किए गए, पर वह लागू नहीं हो पाए
उनके भाजपा सरकार के दौरान कई समझौते किए गए, पर वह लागू नहीं हो पाए। जबकि मैदानी जिलों में तैनात पटवारी भी समान काम का समान वेतन मांग रहेहैं।

नियमित करने को लेकर विद्युत संविदा कर्मी भी काफी समय से हड़ताल पर हैं। गुरुवार को भी उन्होंने आवाज बुलंद की।

प्रयोगशाला सहायकों ने परेड ग्राउंड में प्रदर्शन कर धरना दिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित नर्सिंग, चिकित्सक और संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया है। फार्मेसिस्ट की मांग अभी पूरी नहीं होने से वह भी आंदोलनरत हैं।

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