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Dehradun: निजी भूमि पर पेड़ काटने पर अब नहीं होगी जेल, एक्ट में संशोधन, लागू करने के लिए सरकार लाएगी अध्यादेश

Mon, 27 Mar 2023 09:52 AM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Mon, 27 Mar 2023 09:52 AM IST
सार

निजी भूमि पर खड़े पड़ों को काटने के बाद वन विभाग की ओर से केस दर्ज कराया जाता है। केस की सुनवाई सिविल जज की कोर्ट में होती है। कानून में संशोधन के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) स्तर पर हो सकेगी। आरोपी के संतुष्ट न होने पर वन संरक्षक स्तर पर अपील कर सकता है।

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No jail for cutting trees private land ordinance will bring to implement amendment Up Tree Protection Act 1976
मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 में संशोधन करने से निजी भूमि से पेड़ काटने पर अब जेल नहीं होगी। एक्ट में किए गए संशोधन को लागू करने के लिए सरकार अध्यादेश लाएगी। भराड़ीसैंण में बीते दिनों हुई धामी मंत्रिमंडल की बैठक में यूपी वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 में संशोधन के बाद प्रदेश में इसे लागू करने के लिए सरकार अध्यादेश लाएगी।

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अध्यादेश लागू होने के साथ नया कानून प्रदेश में लागू हो जाएगा। कानून के लागू होने के बाद निजी भूमि पर खड़े पेड़ों को काटना आसान हो जाएगा। नए कानून में निजी भूमि पर खड़े पेड़ों को काटने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। बिना अनुमति पेड़ काटने पर जेल भेजने के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है, लेकिन जुर्माना राशि बढ़ा दी गई है। निजी या सार्वजनिक भूमि पर खड़े सूचीबद्ध किसी भी पेड़ को काटने पर पहली बार पांच हजार प्रति पेड़ जुर्मामा लगेगा।
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दूसरी या तीसरी बार में जुर्माना की राशि 10 हजार से एक लाख तक हो जाएगी। पहले निजी भूमि पर खड़े एक या एक से अधिक पेड़ काटने पर पांच हजार जुर्माना और छह माह की जेल या दोनों का प्रावधान था। अब आरोपी को जेल भेजने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। संशोधित एक्ट में काटे गए गए पेड़ों के सापेक्ष दो गुने पेड़ लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

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डीएफओ स्तर पर होगा केस का निपटारा
निजी भूमि पर खड़े पड़ों को काटने के बाद वन विभाग की ओर से केस दर्ज कराया जाता है। केस की सुनवाई सिविल जज की कोर्ट में होती है। कानून में संशोधन के बाद ऐसे मामलों की सुनवाई प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) स्तर पर हो सकेगी। आरोपी के संतुष्ट न होने पर वन संरक्षक स्तर पर अपील कर सकता है।

हरेला की बैठक में सामने आया था विचार
जुलाई 2022 में हरेला पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव पास किया गया था। इसके बाद एक कमेटी की रिपोर्ट पर एक्ट में संशोधन की रूपरेखा तैयार कर शासन को सौंपी गई थी।

उत्तराखंड राज्य वृक्ष संरक्षण निधि की होगी स्थापना
उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 में संशोधन के साथ ही उत्तराखंड राज्य वृक्ष संरक्षण निधि (ट्री प्रोटेक्शन फंड) की भी स्थापना की जाएगी। इसके तहत जुर्माने की राशि इसी फंड में जमा की जाएगी। राशि का प्रयोग पौधरोपण संग वृक्ष संरक्षण आदि में किया जाएगा।

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उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 में संशोधन के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी है। प्रदेश में नया कानून लागू करने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा। विभाग स्तर पर इसे तैयार किया जा रहा है। शीघ्र ही लागू किया जाएगा। - आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण

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