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भारत-नेपाल के कैलाश भू क्षेत्र में वन्य जीवों के विचरण में बाधा नहीं बनेंगी सीमाएं

Thu, 24 Jan 2019 03:56 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal दीप जोशी, अमर उजाला, अल्मोड़ा
दीप जोशी, अमर उजाला, अल्मोड़ा Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 24 Jan 2019 03:56 PM IST
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no boundaries for animal in india nepal kailash area utarakhand news
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सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में कैलाश पर्वत के आसपास उच्च हिमालयी क्षेत्र में भारत-नेपाल और चीन की सीमा पर पाए जाने वाले कस्तूरी मृग, स्नो लेपर्ड आदि वन्य जीवों के स्वतंत्र विचरण पर देशों की राजनीतिक और भौगोलिक सीमा बाधा नहीं बनेगी। पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत कार्य कर रहे भारत और नेपाल के वैज्ञानिकों की हाल में हुई बैठक में इसे लेकर सहमति बन चुकी है और जल्द ही दोनों देशों की ओर से परियोजना की नोडल एजेंसियां इसके लिए अपने देश की सरकार को संस्तुति भेजेंगी। परियोजना में शामिल तीसरे देश चीन की ओर से भी आगामी बैठक में इस मुद्दे पर वार्ता करके संस्तुति कराने की योजना है।

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बता दें कि भारत, चीन और नेपाल अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईसीमोड) के तहत 2013 से हिमालय के कैलाश भू क्षेत्र के संरक्षण के लिए आपसी सहयोग से काम कर रहे हैं। यह परियोजना तीनों देशों के करीब 31 हजार वर्ग किमी इलाके में चल रही है। इसमें 14 हजार वर्ग किमी क्षेत्र नेपाल में, 10 हजार वर्ग किमी चीन में और सात हजार वर्ग किमी क्षेत्र भारत में है। पहले चरण में पांच साल में तीनों ही देशों ने अपने क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता सहित अन्य विषयों से जुड़े विभिन्न तरह के अध्ययन किए, अब दूसरे चरण में इन्हें कार्यरूप दिया जा रहा है।
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बताया गया है कि दिसंबर में भारत और नेपाल के वैज्ञानिकों की हुई बैठक में इस बात पर सहमति हुई है कि कैलाश पर्वत के इस परियोजना के लिए चिन्हित क्षेत्र में दोनों देशों की सीमा के भीतर पाए जाने वाले कस्तूरी मृग, स्नो लेपर्ड, बरल आदि जीव जंतुओं के प्राकृतिक वास में राजनीतिक और भौगोलिक सीमा को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। हालांकि अभी तक इस इलाके में किसी तरह की बाड़ आदि बनी भी नहीं है।
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भारत की ओर से परियोजना की नोडल संस्था जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के निदेशक डॉ.आरएस रावल के मुताबिक इस उच्च हिमालय क्षेत्र में दोनों देश भविष्य में किसी तरह की बाड़ आदि नहीं बनाएंगे ताकि वहां पाए जाने वाले दुर्लभ जीव जंतु स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकें। इस संबंध में केंद्र सरकार को संस्तुति भेजी जा रही है और नेपाल की नोडल एजेंसी भी इसके लिए अपनी सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना में शामिल चीन के वैज्ञानिकों से भी अगली बैठक में इसके लिए वार्ता की जाएगी और कैलाश भू-क्षेत्र में चीन की सीमा में भी वन्य जीवों के लिए किसी तरह की बाधा नहीं रखने पर सहमति करवाकर वहां की सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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